गन्ने की मिठास compleet

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The Romantic
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 13:14

nice very nice

rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 05 Nov 2014 05:15

गन्ने की मिठास--40

गतान्क से आगे......................

तभी मैने अपने दोनो हाथो से रति की चूत की फांको को थोड़ा फैला कर जब उसकी गुलाबी

रसीली चूत को अपनी नाक से सूँघा तो क्या मदमाती खुश्बू थी मैं तो मम्मी की चूत की मूत की गंध से एक दम

से पागल हो गया और अपनी लंबी जीभ निकाल कर मम्मी की चूत को अपने मूह मे भर कर उसकी चूत के छेद के

रस को चूस चूस कर पीने लगा और मम्मी अया आहह हाय मर गई राज यह क्या कर रहा है बेटे आह आह सीई सीयी

सीईईईईईईईईईईईई अहह.

क्या चिकनी गंद थी मम्मी की और उसकी चूत जितना चिकना पानी छ्चोड़ रही थी मुझे उतना ही मज़ा अपनी मम्मी की

मस्त चूत का रस पीने मे आ रहा था, मैने अपने दोनो हाथो से मम्मी की गंद और चूत को फैला रखा था

और अपनी जीभ निकाल कर खूब चूस चूस कर मम्मी की चूत का पानी चाट रहा था, मम्मी की चूत पिछे से भी

इतनी फूली औट उठी हुई दिखाई दे रही थी और उसकी चूत की फांके खूब फूली हुई थी और जब दोनो फांको को अलग

किया तो उसकी चूत का गुलाबी रस से भरा हुआ छेद बड़ा ही नशीला रस छ्चोड़ रहा था जिसे पी पी कर मैं मस्त हुआ

जा रहा था,

तभी हरिया ने मम्मी का हाथ पकड़ कर उसे सीधे खड़ा कर दिया और अपनी बंदूक की नली उसकी दोनो जाँघो के

बीच डाल कर कहा "चल अपनी टाँगे थोड़ा फैला ले अब यह लोन्डा तेरी फूली हुई चूत तुझे खड़ी करके तेरी चूत

के सामने बैठ कर चुसेगा, हरिया का इतना कहना था कि मम्मी ने झट से मेरे लंड की ओर देखा और फिर अपनी

जाँघो को थोड़ा खोल कर खड़ी हो गई, मम्मी की फूली चूत और चूत के बीच की मोटी सी गहरी लकीर बड़ी मस्त

नज़र आ रही थी और मैने अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत की गहरी लकीर को जीभ से खोलने की कोशिश करते हुए

उसकी चूत को चाटने लगा और मम्मी ने एक हाथ से अपने मोटे मोटे दूध को दबोचते हुए मेरे सर पर हाथ

फेर कर सहलाना शुरू कर दिया और साथ ही ओह आह सीई सीई आह राज आह बेटे आह की आवाज़ निकालने लगी,

मम्मी

वैसे तो काफ़ी फ्रॅंक और निडर थी लेकिन आज वह सिर्फ़ मज़ा ले रही थी और कह कुच्छ नही पा रही थी, अब उसकी शर्म

लगभग ख़तम हो चुकी थी और यह इस बात से पता चलता था कि अब मम्मी अपने हाथो से अपनी चूत की फांको को

फैला कर अपनी चूत मेरे मूह पर दे रही थी और मैं उनकी गंद मे हाथ भर कर उनकी मोटी मोटी जाँघो को

खूब दबाता हुआ उनकी चूत चाट रहा था,

तभी मैने मम्मी की एक टांग पकड़ कर थोड़ा उपर उठाया तो मम्मी ने साइड के पेड़ को पकड़ कर अपनी टांग

उठा कर मेरे कंधे पर रख दी और मैं मम्मी की टाँगो के बीच घुस कर उसकी चूत को खूब फैला कर पागलो

की तरह चाटने लगा और मम्मी ऐसा लग रहा था कि मेरे मूह पर अपनी चूत रख कर बैठ जाना चाहती है वह

जितना वजन अपनी चूत का मेरे मूह पर देती मैं उतनी ही ज़ोर से उसकी चूत को अपने होंठो से दबोच कर उसका रस

चूसने लगता,


rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 05 Nov 2014 05:15

मैं अपने दोनो हाथो से कभी उसकी गुदाज गंद मसलता और कभी उसकी मोटी जाँघो को चूमता

सहलाता और उसकी छूट खूब ज़ोर ज़ोर से पीने लगता, मम्मी लगातार आह ओह हाय राज बेटे आह आह ओह बेटे जैसी आवाज़निकाल कर मेरे सर को सहला रही थी, तभी मम्मी ने मेरे मूह को कस कर अपनी चूत से दबोच लिया और मैने

भी उसकी चूत की फांको को खूब चौड़ा करके अपनी जीभ को नुकीली करके उसकी चूत के छेद मे घुसेड़ना शुरू

कर दिया और मम्मी एक दम से आह आह अहः अहह राज मैं गई और फिर मम्मी की चूत ने खूब

सारा रस छ्चोड़ दिया और उसके चेहरे पर खूब चुदस्पान के भाव उभर आए और उसकी मोटी जंघे खड़ी खड़ी

काँपने लगी,

हरिया ने जैसे ही यह नज़ारा देखा वह पास आया और मुस्कुराते हुए कहने लगा, लगता है इस रानी को पेशाब

लगी है तभी यह अपनी चूत को इतना ज़ोर से तेरे मूह से रगड़ रही है, फिर हरिया ने मम्मी के उपर बंदूक तान

कर कहा चलो रानी अब तुम मुतती जाओ और तुम्हारा यह यार तुम्हारी चूत चाटता जाएगा,

हरिया की बात सुन कर मम्मी ने एक बार हरिया को देखा और फिर अपनी नज़रे नीचे कर ली,

राज- मैं आपके हाथ जोड़ता हू अब हमे जाने दो,

हरिया- ला रामू ज़रा मेरी चिलम तो जला और फिर रामू ने उसकी चिलम जला कर दी और हरिया ने एक कश खींचा

और उसकी आँखो मे खून उतर आया और उसने बंदूक मेरे सीने पर तान कर कहा

हरिया- देख लोंडे चुप चाप इस रंडी को बोल कि अभी के अभी मेरे सामने खड़ी खड़ी मुतेगि नही तो आज तेरी जान

तो जाएगी ही साथ मे इसे भी मार कर फेंक देंगे, और फिर हरिया ने बंदूक के ट्रिग्गर पर उंगली रखते हुए

कहा बोल बच्चे दबाऊ ट्रिग्गर,

रति- एक दम से घब राते हुए, नही नही अपनी बंदूक हटा लो तुम जैसा कह रहे हो मैं वैसा ही करूँगी पर

मेरे राज को कुच्छ ना करो,

हरिया- यह हुई ना बात लगता है तुम दोनो मे बड़ा प्यार है, चलो अब शुरू हो जाओ

मैं हरिया का कमीनपन देख कर मस्त हो रहा था और मेरा लंड पूरी तरह तना हुआ था, मैने मम्मी की

दोनो मोटी जाँघो को पकड़ कर उसकी फूली हुई चट को देखा जो पूरी चिकनी नज़र आ रही थी फिर अपनी नज़रे उठा

कर जब मैने मम्मी को देखा तो वह थोड़ा शरमाते हुए अपनी आँखे बंद करके मूतने की कोशिश करने

लगी और मैं उसकी चूत के बिल्कुल सामने मूह करके उसके दाने को धीरे धीरे अपनी उंगली से रगड़ने लगा तभी

मम्मी की चूत से छुल्ल से थोड़ा सा पेशाब निकला और मैने तुरंत अपनी जीभ से मम्मी की चूत चाटना शुरू

कर दिया,

मैने जैसे ही मम्मी की चूत को चटा वैसे ही मम्मी का मूत रुक गया और जब मैने मूह हटाया तो

मम्मी ने थोड़ा और ज़ोर लगाया और उसकी चूत से फिर से थोड़ी सी धार निकलते देख मैने तुरंत उसकी चूत चाटना

शुरू कर दिया, अब मम्मी की चूत से बूँद बूँद मूत निकल रहा था और मैं उसे चाटता जा रहा था,

जब मम्मी

की चूत से मूत बंद हो गया तो मैने उसकी चूत के उस छेद को पकड़ कर चूसना शुरू कर दिया जहाँ से मम्मी

का मूत निकल रहा था और मम्मी आह आह सीई सीईईईईई आहा राज आह ओह करने लगी , मैं अपनी मम्मी की चूत को खूब कस कस कर चूसने लगा और वह अपनी चूत को मेरे मुँह पर खूब रगड़ रगड़ कर मारने लगी,