गन्ने की मिठास compleet

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rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 15 Oct 2014 01:34

रुक्मणी- वाह बाबा जी कितना मस्त हथियार छुपा रखा है आपने अब मुझसे नही रहा जाता बाबा जी जबसे मैने आपका मोटा लंड रमिया की चूत मे आते हुए देखा था तब से आपसे चुदने के लिए मरी जा रही हू,

राज- बेटी अब सिर्फ़ तुम्हारी मोटी गंद मे तेल लगाना बाकी बचा है,

रुक्मणी- बाबा जी पहले मेरी चूत को खूब अच्छे से ठोंक दो फिर तो सारी रात पड़ी है आराम से मेरी गंद मे तेल लगा कर रात भर मेरी गंद मारना,

राज- अच्छा बेटी अब तुम पीठ के बल लेट जाओ और फिर रुक्मणी जब पीठ के बल लेट गई तब उसने अपनी जाँघो को उपर उठा कर मोड़ लिया और उसकी रसीली चूत मेरे सामने आ गई मैने अपनी जीभ से रुक्मणी की गुलाबी फूली हुई चूत को चाटना शुरू कर दिया और रुक्मणी तड़पने लगी,

रुक्मणी- ओह बाबा जी खूब चुसू खूब चतो मेरी चूत को आह आह ओह बाबा जी आपका लंड बड़ा मस्त है आज मेरी चूत फाड़ देना बाबा जी,

मैने रुक्मणी की चूत के छेद से बहते रस को चूस चूस कर चाटना शुरू कर दिया और एक हाथ मे तेल लेकर उसकी गंद मे तेल लगाने लगा, पहले एक उंगली से उसकी गंद सहलाने लगा फिर दो उंगलिया उसकी मोटी गंद मे डाल कर जब उसकी चूत मैने तबीयत से चूसना शुरू किया तो रुक्मणी पागलो की तरह बड़बड़ाने लगी

मैने देखा रुक्मणी अब पानी-पानी हो चुकी थी बस फिर मैने अपने मोटे लंड को रुक्मणी की चूत से लगा कर कस कर एक धक्का मारा और रुक्मणी ओह बाबा जी करके ऐथ गई तभी मैने उसकी गुदाज जाँघो को पकड़ कर एक और धक्का मार दिया और मेरा लंड जड़ तक रुक्मणी की चूत मे घुस गया, मैं रुक्मणी की चूत को खूब कस-कस कर चोदने लगा और रुक्मणी अपनी गंद उठा उठा कर कहने लगी ओह बाबा जी खूब चोदो कस कस कर चोदो आह आह बहुत मज़ा आ रहा है,

कितना अच्छा चोद्ते हो आप आपका लंड जो औरत एक बार ले लेगी वह मस्त हो जाएगी आपका लंड तो बड़ी बड़ी घोड़ियो के लायक है बाबा जी और मारिए खूब कस कर मारिए फाड़ दो आह आह सी सी ,

मैं पूरी ताक़त से रुक्मणी को चोद रहा था और वह सीसीया रही थी मैं रुक्मणी के उपर लंड फसाए लेट गया और उसके मोटे-मोटे दूध को खूब दबा दबा कर पीने लगा और रुक्मणी अपनी चूत को खूब ज़ोर से मेरे लंड से दबाने लगी, मैं पूरी ताक़त से खूब कस कस कर उसे चोद रहा था और तभी उसकी चूत ने ढेर सारा पानी छ्चोड़ दिया और रुक्मणी मेरे बदन से कस कर चिपक गई,

कुच्छ देर हम दोनो साँसे लेते रहे उसके बाद रुक्मणी मेरी तरफ पीठ कर के लेट गई और मैं उसके पीछे से उसकी मोटी मुलायम गंद के छेद को तेल भर-भर कर चिकना बनाने लगा,

रुक्मणी- बाबा जी बहुत मोटा लंड है आपका मेरी गंद तो फाड़ कर रख देगा,

राज- बेटी ऐसे मोटे लंड से ही गंद मरवाने मे ज़्यादा मज़ा आता है,

रुक्मणी- बाबा जी मुझे आपका लंड चूसना है

राज- चूसो ना बेटी तुम मेरा लंड जितना चाहे चूस लो फिर मैं आज तुम्हारी मोटी गंद की सारी खुजली दूर कर देता हू, उसके बाद रुक्मणी मेरे लंड को खूब दबोच दबोच कर चूसने लगी और मैं उसकी गुदा मे दो उंगलिया डाल-डाल कर उसे मुलायम करने लगा,

रुक्मणी की गंद को मैने सहला सहला कर खूब मुलायम बना दिया और फिर मैने अपने मोटे लंड को धीरे से रुक्मणी की गंद से सताया तो रुक्मणी ने अपनी गंद मेरी ओर उठा कर अपने हाथो से अपनी गंद को खूब फैला कर मुझे अपनी गंद का छेद दिखाते हुए, लो बाबा जी अब पेलो अपना मूसल मेरी गंद मे, मैने अपने लंड का धक्का धीरे से रुक्मणी की कमर पकड़ कर उसकी गंद मे मार दिया और रुक्मणी ओह बाबा जी करके सीसीया पड़ी मेरे लंड का टोपा उसकी गुदा मे धस चुका था और मैं रुक्मणी के बोबे मसल्ते हुए दूसरे हाथ से उसकी कमर और मोटी गंद सहला रहा था,


rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 15 Oct 2014 01:35

जब रुक्मणी कुच्छ नॉर्मल हुई तब मैने अपने लंड को उसकी गंद मे थोड़ा ज़ोर से दबा दिया और मेरा आधे से ज़्यादा लंड उसकी गुदा मे फस गया,

ओह बाबा जी मर गई, आ मेरी गंद फटी जा रही है बाबा जी कितना मोटा लंड है आपका, आप तो किसी भी औरत की गंद फाड़ सकते हो आह आह. मैं धीरे-धीरे लंड को आगे पिछे करने लगा और रुक्मणी सीसियाते हुए पड़ी रही मैने जब देखा कि अब मेरा लंड उसकी गंद मे धीरे धीरे अंदर बाहर हो रहा है तभी मैने रुक्मणी की गंद को दबोचते हुए एक कस के धक्का मार दिया और मेरा पूरा लंड उसकी गुदा मे समा गया और रुक्मणी ओह बाबा जी मर गई कह कर खूब सीसीयाने लगी,

मैं रुक्मणी की पीठ सहला सहला कर उसकी गंद को खूब गहराई तक चोदने लगा और रुक्मणी सी सी आह आह ओह मा ओह बाबा जी और मारो आह अच्छा लग रहा है बहुत मज़ा आ रहा है करने लगी,

मैं अब ताबड़तोड़ धक्के रुक्मणी की चूत मे मारने लगा उसकी मोटी जंघे जब मेरी जाँघो से टकराती तो ठप ठप की आवाज़ गूंजने लगती, रुक्मणी की गुदा को मैने चोद-चोद कर लाल कर दिया था जब रुक्मणी गंद मरवा-मरवा कर मस्त हो गई तब मैने उसकी गुदा मे अपना वीर्य निकाल दिया,

जैसे ही मैने वीर्य निकाला रुक्मणी ने मेरे लंड को अपनी गंद से निकाल कर अपने मूह मे डाल कर चूसना शुरू कर दिया और मेरा सारा पानी चाट चाट कर साफ कर दिया,

रुक्मणी लेट कर मेरे लंड से खेल रही थी और मैं उसके उठे हुए पेट और मोटे-मोटे दूध को सहला रहा था, उस रात मैने रुक्मणी की एक बार और चूत मारी और फिर एक बार उसकी गुदाज गंद को भी तबीयत से चोदा, उसके बाद मैं सुबह सुधिया को कैसे चोदना है उसके बारे मे सोचता हुआ सो गया,

सुबह 4 बजे ही सुधिया की याद मे मेरी नींद खुल गई और मैं चुपके से उठ कर तालाब की ओर चल दिया, मैं

मन मे सोच रहा था कि क्यो ना पहले मैं ही सुधिया की चूत मार लू उसके बाद हरिया का नंबर. लगाऊ, मैने अपने

प्लान को थोड़ा चेंज करना ही ठीक समझा और एक पेड़ के नीचे आसान जमा कर बैठ गया,

लगभग आधा घंटा

इंतजार करने के बाद मुझे कोई औरत आती हुई नज़र आई मैं उसके गुदाज शरीर और मटकती चाल को देख कर समझ

गया कि रामू की मा ही चली आ रही है, सुधिया को भी कुच्छ दूर से ही मैं नज़र आने लगा और मैने अपनी

आँखे बंद कर ली,

सुधिया ने जब करीब आकर मुझे देखा तो मेरे पेरो को च्छू कर

सुधिया- परनाम बाबा जी, आप यहाँ सुबह सुबह ?

मैने अपनी आँखे खोली और सुधिया की ओर देखा, उसने लाल कलर का ब्लौज और एक घाघरा पहना हुआ था और

उसके सीने पर कोई चुनरी नही थी, उसके मोटे मोटे दूध उसके ब्लौज मे कैसे समाते होंगे मैं यह सोच रहा

था और जब मैने सुधिया का उठा हुआ गुदाज पेट और गहरी नाभि पर नज़र डाली तो कसम से मेरा लंड तुरंत

खड़ा हो गया,

राज- बेटी सुधिया हम तो रात भर इसी पेड़ के नीचे तपस्या कर रहे है, और वह भी सिर्फ़ तेरी वजह से, क्यो कि

शायद उपरवाला भी तुझ पर मेहरबान है और उसने मुझे तेरे पास भेज दिया ताकि मैं तेरे उपर आने वाले

संकट को दूर कर सकु,

क्रमशः........


rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 15 Oct 2014 01:36

GANNE KI MITHAS--23

gataank se aage......................

rukmani meri bat sun kar ghum kar mere sine se bilkul apni pith sata kar beth gai uski moti gand se mera land bhid gaya aur maine uske aage hath le jakar uske doodh ko khub kas-kas kar dabana shuru kar diya,

raj- rukmani

rukmani- aah ji baba ji

raj- tumne lagta hai paraye mardo se apne badan ko khub dabwaya hai

rukmani- kya karu baba ji isme meri galti nahi hai mera aadmi hariya bhut chudakkad hai jiske bhi aurat ko uska man chodne ka hota hai vah mujhe aage karke use chod leta hai,

raj- matlab beti

rukmani- apni jangho ko phila kar mere hath ko pakad kar apni chut mai rakh leti hai aur kahti hai baba ji jara yaha tel lagao phir mai aapko meri bat ka matlab batati hu

maine rukmani ki chut ki phanko ko dono hantho se achche se phaila liya aur uski chut ko khub sahlane laga,

rukmani- baba ji ek bar mera bada bhai apni bibi ke sath hamare yaha aaya, uski bibi bahut mast mal thi koi bhi mard uski moti gand aur doodh dekh le to uska land khada ho jaye, hariya ki to lar tapakne lagi thi hariya mujhse kahne laga ek bar teri bhabhi ki dilwa de bahut mast mal hai,

maine kaha mai kaise dilwa du tab hariya mujhse kahne laga apne bhaiya ka land apni chut mai legi bada mota land hai uska mere land se double hai tujhe rat bhar nangi karke chodega sach tu mast ho jayegi,

hariya bahut chalak hai vah aurat ki kamjori janta tha isliye aisi bate vah meri chut ka dana sahlate huye kah raha tha, maine kaha mai nahi janti jo tumhara man kahe vah karo,

raj- phir kya hua beti

rukmani- phir kya tha baba ji hariya ne mere bhaiya ko bahhar khat par betha kar chilam pilana shuru kar diya, mai aur meri bhabhi vahi ghar ke andar thi mera dil kiya ki jakar sunu to sahi dono kya bat kar rahe hai aur phir mai chupke se bhabhi se kam ka bahana karke diwar ke pichhe chhup kar unki bate sunne lagi,

hariya ne bhaiya ko chilam pila kar nashe mai dhutt kar diya tha,

bhaiya- aur batao jamai babu kaisa chal raha hai sab,

hariya- are kya batau sale sahab jab se shadi hui haitumhari bahan bahut pareshan karti hai, sach sale saheb bahut chudasi hai tumhari bahan khub mota land chahiye use apni chut mai, uski gand dekhi hai kaise chudwa chudwa ke moti ho gai hai,

bhaiya- are vah to har aurat chudwati hai par isme naya kya hai,

hariya- are tum nahi jante use roj land chahiye aur kabhi kabhi to chudte samay tumhare land ki bate karne lagti hai,

bhaiya- kya kahti hai mere bare mai

hariya- kahti hai bhaiya ka land bahut mota hai ek bar tumhe usne mutte huye dekha tha tab se tumhare land ko lene ke liye bahut tadapti hai, hariya ki bate sun kar bhaiya ka land khada ho gaya tha aur vah masalne lage the,

hariya- muskurate huye kya hua apni bahan ko chodne ka man kar raha hai na

bhaiya- ab tum aisi bate karoge to land to khada hoga na

hariya- aaj chodoge apni bahan ko

bhaiya- par rukmani kya man jayegi

hariya- pahle kaho to chodoge kya

bhaiya- ha chodne ka man to bahut ho raha hai, bhaiya ki bat sun kar meri chut se pani aa gaya tabhi hariya ne mujhe aawaj di aur mai ek dam se sambhal kar uske pass pahuch gai,

hariya ne mera hath pakad kar mujhe apni god mai betha liya aur mere mote-mote doodh mere bhaiya ke samne masalne laga,

rukmani- are chhodo yah kya kar rahe ho bhaiya bethe hai tumhe sharam nahi aati

hariya- are meri rani tera bhaiya bhi to tere mote-mote doodh masalna chahta hai aa achche se khat mai chadh kar beth ja, phir hariya ne mujhe khat mai betha kar meri sadi upar kar di aur bhaiya ko jaise hi meri moti janghe najar aai unse nahi raha gaya aur unhone bhi meri jangho ko apne hantho mai bhar kar daboch liya, bhabhi to pahle se hi chudakkad thi usne bhaiya ke kahne par hariya se apni chut marwai aur bhaiya ne us rat mujhe puri nangi karke khub kas kas kar choda,

rukmani ki bate sun kar mera land uski gand se satne laga aur achanak rukmani ne apna hath pichhe lakar mere lohe jaise tane land ko apne hantho mai bhar kar daboch liya,

rukmani- wah baba ji kitna mast hathiyar chhupa rakha hai aapne ab mujhse nahi raha jata baba ji jabse maine aapka mota land ramiya ki chut mai aate huye dekha tha tab se aapse chudne ke liye mari ja rahi hu,

raj- beti ab sirf tumhari moti gand mai tel lagana baki bachha hai,

rukmani- baba ji pahle meri chut ko khub achche se thonk do phir to sari rat padi hai aaram se meri gand mai tel laga kar rat bhar meri gand marna,

raj- achcha beti ab tum pith ke bal let jao aur phir rukmani jab pith ke bal let gai tab usne apni jangho ko upar utha kar mod liya aur uski rasili chut mere samne aa gai maine apni jeebh se rukmani ki gulabi phuli hui chut ko chtna shuru kar diya aur rukmani tadapne lagi,

rukmani- oh baba ji khub chusu khub chato meri chut ko aah aah oh baba ji aapka land bada mast hai aaj meri chut fad dena baba ji,

maine rukmani ki chut ke chhed se bahte ras ko chus chus kar chatna shuru kar diya aur ek hath mai tel lekar uski gand mai tel lagane laga, pahle ek ungli se uski gand sahlane laga phir do ungliya uski moti gand mai dal kar jab uski chut maine tabiyat se chusna shuru kiya to rukmani pagalo ki tarah badbadane lagi

maine dekha rukmani ab pani-pani ho chuki thi bas phir maine apne mote land ko rukmani ki chut se laga kar kas kar ek dhakka mara aur rukmani oh baba ji karke aith gai tabhi maine uski gudaj jangho ko pakad kar ek aur dhakka mar diya aur mera land jad tak rukmani ki chut mai ghus gaya, mai rukmani ki chut ko khub kas-kas kar chodne laga aur rukmani apni gand utha utha kar kahne lagi oh baba ji khub chodo kas kas kar chodo aah aah bahut maja aa raha hai,

kitna achcha chodte ho aap aapka land jo aurat ek bar le legi vah mast ho jayegi aapka land to badi badi ghodiyo ke layak hai baba ji aur mariye khub kas kar mariye fad do aah aah si si ,

mai puri takat se rukmani ko chod raha tha aur vah sisiya rahi thi mai rukmani ke upar land fasaye let gaya aur uske mote-mote doodh ko khub daba daba kar pine laga aur rukmani apni chut ko khub jor se mere land se dabane lagi, mai puri takat se khub kas kas kar use chod raha tha aur tabhi uski chut ne dher sara pani chhod diya aur rukmani mere badan se kas kar chipak gai,

kuchh der hum dono sanse lete rahe uske bad rukmani meri taraf pith kar ke let gai aur mai uske piche se uski moti mulayam gand ke chhed ko tel bhar-bhar kar chikna banane laga,

rukmani- baba ji bahut mota land hai aapka meri gand to fad kar rakh dega,

raj- beti aise mote land se hi gand marwane mai jyada maja aata hai,

rukmani- baba ji mujhe aapka land chusna hai

raj- chuso na beti tum mera land jitna chahe chus lo phir mai aaj tumhari moti gand ki sari khujli dur kar deta hu, uske bad rukmani mere land ko khub daboch daboch kar chusne lagi aur mai uski guda mai do ungliya dal-dal kar use mulayam karne laga,

rukmani ki gand ko maine sahla sahla kar khub mulayam bana diya aur phir maine apne mote land ko dhire se rukmani ki gand se sataya to rukmani ne apni gand meri aur utha kar apne hantho se apni gand ko khub phaila kar mujhe apni gand ka chhed dikhate huye, lo baba ji ab pelo apna musal meri gand mai, maine apne land ka dhakka dhire se rukmani ki kamar pakad kar uski gand mai mar diya aur rukmani oh baba ji karke sisiya padi mera land ka topa uski guda mai dhas chuka tha aur mai rukmani ke bobe masalte huye dusre hath se uski kamar aur moti gand sahla raha tha,

jab rukmani kuchh normal hui tab maine apne land ko uski gand mai thoda jor se daba diya aur mera aadhe se jyada land uski guda mai fas gaya,

oh baba ji mar gai, aah meri gand fati ja rahi hai baba ji kitna mota land hai aapka, aap to kisi bhi aurat ki gand fad sakte ho aah aah. mai dhire-dhire land ko aage pichhe karne laga aur rukmani sisiyate huye padi rahi maine jab dekha ki ab mera land uski gand mai dhire dhire andar bahar ho raha hai tabhi maine rukmani ki gand ko dabochte huye ek kas ke dhakka mar diya aur mera pura land uski guda mai sama gaya aur rukmani oh baba ji mar gai kah kar khub sisiyane lagi,

mai rukmani ki pith sahla sahla kar uski gand ko khub gahrai tak chodne laga aur rukmani si si aah aah oh ma oh baba ji aur maro aah achcha lag raha hai bahut maja aa raha hai karne lagi,

mai ab tabadtod dhakke rukmani ki chut mai marne laga uski moti janghe jab meri jangho se takrati to thap thap ki aawaj gunjne lagti, rukmni ki guda ko maine chod-chod kar lal kar diya tha jab rukmani gand marwa-marwa kar mast ho gai tab maine uski guda mai apna veerya nikal diya,

jaise hi maine veerya nikala rukmani ne mere land ko apni gand se nikal kar apne muh mai dal kar chusna shuru kar diya aur mera sara pani chat chat kar saf kar diya,

rukmani let kar mere land se khel rahi thi aur mai uske uthe huye pet aur mote-mote doodh ko sahla raha tha, us rat maine rukmani ki ek bar aur chut mari aur phir ek bar uski gudaj gand ko bhi tabiyat se choda, uske bad mai subah sudhiya ko kaise chodna hai uske bare mai sochta hua so gaya,

subah 4 baje hi sudhiya ki yaad mai meri neend khul gai aur mai chupke se uth kar talab ki aur chal diya, mai

man mai soch raha tha ki kyo na pahle mai hi sudhiya ki chut mar lu uske bad hariya ka no. lagau, maine apne

plan ko thoda change karna hi thik samjha aur ek ped ke niche aasan jama kar beth gaya,

lagbhag aadha ghanta

intjar karne ke bad mujhe koi aurat aati hui najar aai mai uske gudaj sharir aur matakti chal ko dekh kar samajh

gaya ki ramu ki ma hi chali aa rahi hai, sudhiya ko bhi kuchh dur se hi mai najar aane laga aur maine apni

aankhe band kar li,

sudhiya ne jab karib aakar mujhe dekha to mere pero ko chhu kar

sudhiya- paranam baba ji, aap yaha subah subah ?

maine apni aankhe kholi aur sudhiya ki aur dekha, usne lal color ka blauj aur ek ghaghra pahna hua tha aur

uske sine par koi chunri nahi thi, uske mote mote doodh uske blauj mai kaise samate honge mai yah soch raha

tha aur jab maine sudhiya ka utha hua gudaj pet aur gahri nabhi par najar dali to kasam se mera land turant

khada ho gaya,

raj- beti sudhiya hum to rat bhar isi ped ke niche tapasya kar rahe hai, aur vah bhi sirf teri vajah se, kyo ki

shayad uparwala bhi tujh par meharban hai aur usne mujhe tere pass bhej diya taki mai tere upar aane wale

samkat ko dur kar saku,

kramashah........