अजब प्रेम की गजब कहानी compleet

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rajaarkey
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Re: अजब प्रेम की गजब कहानी

Unread post by rajaarkey » 15 Oct 2014 07:42

अवी- मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड़ कर, अपनी खूबसूरत दीदी को देख रहा हू

डिंपल- अपना हाथ छुड़ाते हुए, तुझे और कोई काम है मुझे देखने के अलावा

अवी- दीदी एक बात बोलू

डिंपल- कौन सी बात

अवी- उसके गालो को अपने हाथो से छूकर, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो

डिंपल- मुस्कुरकर मुझे लगता है तू एक दो दिन से पागल हो गया है

अवी- डिंपल के सामने ही उसके भरे हुए बदन पर नज़र मारते हुए उसकी बाँहो मे अपनी उंगली उपर से लेकर नीचे की ओर

चला कर, जिसकी इतनी खूबसूरत दीदी हो वह पागल नही तो क्या होगा

डिंपल-मुस्कुरा कर उठते हुए, मैं जा रही हू तू बैठ यहा

अवी-अपनी दीदी का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खिचता है और वह एक दम से उसकी गोद मे गिरते हुए बैठ जाती है और फिर जल्दी

से उठने की कोशिश करती है और अवी उसका हाथ पकड़ कर, दीदी कहाँ जा रही हो

डिंपल- अपनी आँखे दिखा कर खड़ी हो जाती है और अवी तू पागल हो गया है यह क्या कर रहा है

अवी -उसका हाथ पकड़ कर दीदी मैं तुम्हारी पप्पी लेना चाहता हू

डिंपल- अपना हाथ छुड़ा कर, छोड़ मुझे और मुस्कुराते हुए जाने लगती है और पलट कर अवी तू सचमुच पागल हो गया

है

अवी- बैठे-बैठे मुस्कुराता हुआ, दीदी प्लीज़ एक पप्पी दे दो ना

डिंपल- मुस्कुराते हुए पलट कर बड़ा आया पप्पी लेने वाला और अपने बेडरूम मे घुस जाती है

अवी उसे देख कर मुस्कुराता रहता है और फिर थोड़ी देर बाद ही डिंपल वापस बाहर आती है और अवी को देख कर मुस्कुराते

हुए किचन मे चली जाती है और फिर वापस आकर अवी के सामने बैठ कर एक बुक उठा कर पढ़ने लगती है, अवी उसको

देख कर मुस्कुराता है और डिंपल भी उसे देख कर मुस्कुराने लगती है, अवी कुछ देर तक डिंपल के खूबसूरत चेहरे को

देखता रहता है फिर कुछ सोच कर दीदी चलो मार्केट चले

डिंपल- मगर क्यो

अवी- तुम भूल गई पापा ने कहा था कि मोबाइल खरीद लेना

डिंपल- हाँ कहा तो था पर

अवी- उसका हाथ पकड़ कर उठाते हुए जल्दी उठो ना

डिंपल- अब ज़रा रुक जा तेरे सर पर तो एक दम से भूत सवार हो जाता है, मुझे अपने कपड़े तो चेंज करने दे

अवी- अच्छा ठीक है चलो जल्दी कर लो

डिंपल- उठ कर अपने रूम की ओर जाती है और अवी उसके पीछे-पीछे रूम मे पहुच जाता है, डिंपल अपने आप से ज़ोर से

बतियाते हुए क्या पहनु, क्या पहनु

अवी- दीदी जीन्स और टीशर्ट पहन लो

डिंपल- मुस्कुरा कर चल तू कहता है तो पहन लेती हू और फिर डिंपल अपना जीन्स और टीशर्ट निकाल कर अवी को देखती हुई तू

यहाँ खड़ा-खड़ा मेरा मूह क्या देख रहा है मुझे कपड़े पहनना है

अवी- तो पहनो ना जल्दी से

डिंपल- उसे घुरती हुई तू बाहर जाएगा तब ना पहनूँगी

अवी- उसकी बात को सुन कर उसके जिस्म को अपनी निगाहो से उपर से नीचे तक देखता हुआ उसकी आँखो मे देखता है और डिंपल

उसकी नज़रो को देखने लगती है और अवी अपनी दीदी की आँखो मे देखता हुआ धीरे-धीरे उसकी ओर जाने लगता है दोनो के

चेहरे पर सीरीयस भाव थे लेकिन दोनो की नज़रे बिना पालक झपकाए एक दूसरे की आँखो मे देख रही थी, अवी जैसे-जैसे

डिंपल के करीब जा रहा था डिंपल कुछ बेचैन होती जा रही थी और अवी जब उसके एक दम से करीब पहुच जाता है तो

डिंपल की साँसे कुछ तेज हो जाती है,

rajaarkey
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Re: अजब प्रेम की गजब कहानी

Unread post by rajaarkey » 15 Oct 2014 07:42

दोनो एक दूसरे के बिल्कुल करीब खड़े हुए एक दूसरे की आँखो मे देखते है तभी

अवी- उसके गोरे गालो पर अपना हाथ फेर कर सहलाता हुआ, दीदी जब तुम मुझे अपनी ऐसी निगाहो से देखती हो तो मेरा दिल करता

है कि मैं तुम्हे, और फिर अवी कहते हुए एक दम से रुक जाता है और पलट कर रूम से वापस आने लगता है और डिंपल

एक बुत की तरह उसे देखती रहती है और अपने मन मे खुद ही कुछ सवाल करने लगती है और अपने आप को ही धोखा देते

हुए यह सोचती है कि पता नही अवी ऐसी बाते क्यो कर रहा है जबकि उसका दिल सच्चाई के काफ़ी करीब होता है और वह अवी

की हर्कतो को समझने लग जाता है, अवी की बातो पर डिंपल को कभी गुस्सा आता है और कभी उसे उसकी हरकते अच्छी भी

लगने लग जाती है, डिपेंड करता है कि उसका मन कैसा है,

डिंपल जैसे ही बाहर आती है अवी उसको देख कर सन्न रह जाता है क्यो की वह डिंपल को पहले बहुत कम टीशर्ट और जीन्स

मे देख पाया था, उनका टाइमिंग ही ऐसा था कि अवी सुबह से शाम तक गायब रहता था और डिंपल कभी जीन्स टीशर्ट कॉलेज पहन कर जाती भी तो शाम को आने के बाद उतार देती थी,

डिंपल का भरा हुआ बदन और खूबसूरती देख कर अवी एक दम से पागल हो जाता है और जब उसकी नज़रे डिंपल के कसे

हुए मोटे-मोटे दूध जो टशहिर्त से साफ नज़र आ रहे थे को देख कर एक दम से उसके मोटे-मोटे दूध को घूर्ने लगता

है और डिंपल बड़े आश्चर्या से उसकी नज़रो को अपने दूध पर गढ़ाए देख कर मन ही मन बहुत गुस्सा होती है पर

पता नही अवी को कुछ कह क्यो नही पाती है, अवी इसी वजह से बिना डरे जब तक उसका मन करता है डिंपल के दूध को

निहारता रहता है और फिर आख़िर मे डिंपल को ही मजबूरन उसे कहना पड़ता है, अवी क्या देख रहा है अब चल भी

अवी- उसकी आँखो मे खुश होता हुआ देख कर, दीदी तुम नही जानती तुम कितनी खूबसूरत हो

डिंपल- उसके मूह से अपनी तारीफ सुन कर पता नही अंदर ही अंदर कुछ खुश हो जाती है और चल अब ज़्यादा झूठी तारीफ मत

कर मेरी और यह ले लॉक दरवाजे पर लगा दे

अवी उसके हाथ से लॉक ले लेता है और डिंपल उसके साइड से घर के बाहर जाने लगती है और अवी जब अपनी दीदी के गदराए हुए

मोटे-मोटे चूतादो को जो जीन्स मे पूरी तरह कसे हुए एक अलग ही अंदाज मे थिरक रहे थे को देखता ही रह जाता है

और डिंपल थोड़ा आयेज जाकर उसकी ओर पलट के देखती है तो अवी को अपने चूतादो को देखता पाकर अपने चेहरे पर गुस्सा

लाते हुए अपने मन मे अवी तू कितना गंदा है अपनी सग़ी बहन को ही इस तरीके से देख रहा है पता नही दूसरी लड़कियो के साथ क्या करता होगा,

अवी- डोर को लॉक करके डिंपल के पास आकर उसके गले मे हाथ डाल कर चलो दीदी

डिंपल- उसका हाथ हटाते हुए, उसको घूर कर देखती हुई बाहर तो कम से कम तमीज़ से चलो

अवी- मुस्कुराता हुआ, तुम तो ऐसी बात कर रही हो दीदी जैसे मैं घर मे तुम्हारे साथ बदतमीज़ी करता हू

डिंपल- अपने मन मे, तो कौन सा मुझे तमीज़ की नज़र से देखता है, तेरी हरकते मैं बराबर दो दिन से देख रही हू

अपने आप को ज़्यादा ही स्मार्ट समझने लगा है,

डिंपल- अरे अवी कोई रिक्शा तो लेकर आ

अवी- अरे दीदी चलो पाँव-पाँव ही चलते है घूमना फिरना भी हो जाएगा

डिंपल- उसे घूर कर देखती है और अवी मुझे पाँव-पाँव नही जाना है तू जल्दी से कोई रिक्शा ले कर आ

अवी- अच्छा बाबा गुस्सा क्यो करती हो कहो तो तुम्हे अपनी गोद मे उठा कर ले चलु

डिंपल- ज़्यादा स्मार्ट मत बन और कोई रिक्शे को हाथ दे और अवी एक रिक्शे को रोकता है और फिर दोनो उसमे सवार हो जाते है

अवी आगे की ओर झुक कर डिंपल के खूबसूरत मुखड़े को घूर्ने लगता है और डिंपल बिल्कुल करीना केपर की स्टाइल मे उसे गुस्से से घूर कर देखने लगती है

तभी अवी की नज़रे अपनी दीदी के मोटे-मोटे टीशर्ट मे कसे हुए दूध पर चली जाती है और डिंपल उसे अपने दूध को

घूरते हुए देख लेती है और अपने हाथ आगे लेजा कर दोनो हाथो को अपने मोटे-मोटे दूध पर बाँध लेती है और

सामने देखने लगती है, अवी उसके गुस्से से लाल चेहरे को देखता रहता है और अपने मन मे सोचता है दीदी तुम नही जानती

तुम्हारे इस गुस्से से लाल चेहरे को चूमने के लिए मैं कितना तड़प रहा हू, लगता है मैं तुम्हारी मोहब्बत मे पागल हो

जाउन्गा,

डिंपल- अवी को लगातार अपनी और घूरते देख कर, धीरे से कहती है, अवी कम से कम यहाँ तो मुझे इस तरह मत घूर

अवी- क्यो घर मे, मैं तुम्हे घूरता हू क्या

डिंपल- उसको आँखे दिखाती हुई ज़्यादा स्मार्ट मत बन

अवी- मुस्कुरकर दीदी कही ऐसा होता कि यह रिक्शा जिंदगी भर ऐसे ही चलता रहता और मैं तुम्हे ऐसे ही बैठे-बैठे

देखता रहता,

डिंपल- उसकी बात सुन कर अपनी मुस्कान रोक नही पाती है और, अवी तू कितनी ही कोशिश कर ले तेरी कोई भी इच्छा कभी पूरी

होने वाली नही है,

अवी- दीदी मेरी जिंदगी मे चाहे कोई भी इच्छा पूरी ना हो, पर बस एक इच्छा मैं चाहता हू की ज़रूर पूरी हो जाए

डिंपल- उसको देखती हुई कौन सी इच्छा

अवी- अपने चेहरे पर सीरीयस भाव लाता हुआ डिंपल की आँखो मे देखने लगता है और डिंपल कुछ देर तक उसकी आँखो

को देखती है और अवी जैसे ही अपनी नज़रे एक बार अपनी दीदी के मोटे-मोटे दूध पर डाल कर वापस डिंपल की आँखो मे

देखता है, डिंपल कुछ झेप्ते हुए अपनी नज़रे दूसरी ओर करके बाहर देखने लगती है,

अवी अपने शर्ट की जेब से पेन निकालता है और अपनी नज़रे नीचे करके अपनी हथेली को खोलता है और डिंपल उसकी और देख कर

उसकी हथेली को देखने लगती है, अवी पेन से अपनी हथेली पर एक खड़ी लाइन खिचता है और फिर पेन से खड़ी लाइन के उपर

के हिस्से से उल्टा सी बनाता हुआ उसे उस लाइन के नीचे के हिस्से से मिला कर डी बना देता है और धीरे से अपनी मुट्ठी बंद

करके जैसे ही डिंपल की ओर देखता है डिंपल एक दम से अपना मूह दूसरी ओर घुमा लेती है और उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से

धड़कने लगता है, अवी डिंपल से वापस अपनी नज़रे हटा कर अपनी मुट्ठी की ओर देखता है और डिंपल उसको अपना मूह

सामने किए हुए उसकी हथेली की ओर तिर्छि नज़रो से देखती है और अवी उस डी को अपने पेन से गहरा करता हुआ उसके आगे आइ

लव यू लिख कर वापस अपनी मुट्ठी को बंद करके जैसे ही डिंपल की ओर देखता है डिंपल की साँसे एक दम से चढ़ जाती है

और वह अपने मूह को दूसरी ओर घुमा कर अपनी आँखे बंद कर लेती है,

क्रमशः........


rajaarkey
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Re: अजब प्रेम की गजब कहानी

Unread post by rajaarkey » 15 Oct 2014 07:43

AJAB PREM KI GAJAB KAHANI --5

gataank se aage......

avi- aur kya raghu bhai kya ho raha hai

raghu- are aao avi bhaiya, achcha hua tum aa gaye hum to aaj subah se tumko hi yaad kar rahe the

avi- kyo raghu bhai aisi kya bat hai

raghu- are avi bhaiya usko jante ho na jo samne wale makan mai chhat par khadi ho kar pani ki nali se ped paudho ko

pani deti rahti hai aur apni moti gadrai gand matka-matka kar jhuk-jhuk kar apne bhari-bhari chutad hamari aur dikhati

rahti hai,

avi- kaun shila aunty ki bat kar rahe ho kya

raghu- are ha vahi jise hum shila ki jawani ke nam se pukarte hai

avi- ha uski gand to bahut moti aur uthi hui hai use dekh kar to mera land turant khada ho jata hai

raghu- are avi bhaiya aaj jante ho vah jab paudho ko pani dal rahi thi to usne apni sadi ko upar tak chadha kar bilkul

chhat ke kinare khadi hokar pani de rahi thi aur mai jab uske ghar ke pas wali dukan se saman lene gaya to uski gori-gori

pindliya dekh kar mera land khada ho gaya aur maine jaise hi upar najar mari kasam se uski moti-moti janghe tak najar

aa gai kya mal hai avi bhaiya ek bar chodne ko mil jaye to maza aa jayega

avi- yaar raghu bhai ek bat batao agar kisi ladki se pyar ho jaye to use kaise bataya jay ki mai usse kitna pyar karta hu

raghu- are isme kya hai usse sidhe kah do ki mai tumse pyar karta hu

avi- are yah to mai kitni bar kah chuka hu par vah use majak mai le leti hai

raghu- to phir uske mast badan ko uske samne hi khub achche se dekho to vah samajh jayegi ki tum use chodna chahte

ho aur bas phir vah bhi tumhe pas aane ka rasta de degi

avi- are raghu bhai mai uske badan ko bhi dekh chuka hu par vah koi reply nahi deti hai ab batao kya kare

raghu- avi bhaiya aisi kaun si ladki hai jiske tum doodh aur gand ko usi ke samne dekhte ho aur vah kuch nahi kahti, iska

matlab to yahi hua ki use bhi tumhara dekhna achcha lagta hai nahi to abhi tak to tumhe kuch na kuch kah hi deti

avi- kya sachmuch use achcha lagta hoga

raghu- are avi bhaiya tum ladkiyo ko nahi jante koi ek bar unke doodh ko ghur kar dekh leta hai to vah us bat ko kam se

kam din bhar mai 50 bar sochti hai aur 90 percent ladkiya soch-soch kar khush hoti hai aur kai ladkiya to garam bhi ho

jati hai

avi- yaar raghu bhaiya tum bat to bilkul thik kah rahe ho, par iske bhi aage badhne ke liye kya karna chahiye,

raghu- kya vah ladki jyada nakhra dikha rahi hai kya, mera matlab hai tumhe mana bhi nahi kar rahi hogi aur tumhe

apne pas bhi nahi aane de rahi hogi

avi- bilkul thik kah rahe ho raghu bhai mai use har tarah se bata chuka hu par pata nahi vah jan bhuj kar anjan ban rahi

hai ya phir mere pas aana hi nahi chahti

raghu- avi bhaiya phir to ek hi bat ho sakti hai vah sochti hogi ki tum hi pahal karke use apni banho mai bhar lo, jab tak

tum use yaha vaha hath nahi lagaoge vah aise hi nakhra karti rahegi, thoda bahut use chuoge tab hi to uske bhi badan

mai current daudega, ek bar tumne thoda sa current uske badan mai dauda diya to phir vah khud hi tumhare aas pass

mandrane lagegi taki tum use phir se thoda current lagao aur use maza aaye

avi- khush hote huye kya bat hai raghu bhaiya, tumne ek dam pate ki bat kahi hai, bina uske karib jaye use pighlana

aasan nahi hoga jab mai uske karib jakar use thoda chuoga tab hi to use bhi ehsas hoga ki kisi mard ke sath chipakne

mai kaisa lagta hai,

raghu- par avi bhaiya vah hai kaun

avi-are raghu bhai tum use nahi jante ho par vah mujhe itni pyari lagti hai ki mai use din rat apni banho mai lekar

chumte rahna chahta hu

raghu- muskurate huye keval chumna hi chahte ho ya use chodna bhi chahte ho

avi- raghu ki bat sun kar ek dam se uttejit ho jata hai aur apne man mai sochta hai kya mai sachmuch apni didi ko

chodna chahta hu

raghu- are kaha kho gaye avi bhaiya lagta hai apni jan ko khyalo mai hi chodne lage ho kya

avi- raghu bhai ek jaruri kam yaad aa gaya mai bad mai tumhare pas aata hu

raghu- are avi bhaiya bas 5 minute aur ruk jao phir chale jana, kya koi bahut khubsurat apsara ko patane mai lage ho, mai to kahta hu avi bhaiya ab tum bade bhi ho gaye ho aur sundar bhi dikhte ho, jaldi se use pata kar use apni banho mai bhar lo, sach avi bhaiya aaj tak tumne kisi ladki ko choda nahi hai na

avi- nahi raghu bhai kisi ko nahi choda hai

raghu- aur kisi ko nangi dekha hai ki nahi

avi- photo aur movie mai dekha hai par vastvik mai nahi dekha hai

raghu- are avi bhaiya jab tum use puri nangi karke apne sine se chipkaoge na tab tum yahi kahoge ki isse jyada maza duniya mai kisi bhi cheej mai nahi hai, aur phir ek bat aur kahu avi bhaiya, ladkiyo ko chodne mai to bahut maza aata hai par agar hum us ladki ko chode jise hum sachche dil se pyar bhi karte hai tab avi bhaiya vah maza 100 guna se bhi jyada badh jata hai kyoki us samay tum use sachche dil se apni banho mai bhar kar use pyar karte ho

avi- raghu bhaiya aap yah bat to bilkul sahi kah rahe ho, par maine use kabhi chodne ke bare mai socha nahi hai

raghu- avi bhaiya jis din vah tumhe apna man legi na to sab se pahle vah tumse chudne ke liye hi tadapegi, aur tum use jis din apne sine se laga loge na us din se tum use puri nangi karke apne badan se chipkane ke liye tadapne lagoge, yah hota hai pyar aur sex mai, jab pyar aur sex dono ehsas mil jate hai to duniya ke har sukh uske aage phike najar aate hai

kya tum use nangi dekhne ke liye nahi tadapte ho

avi- ha raghu bhaiya mai use puri nangi karke apni banho mai bhar kar use khub pyar karna chahta hu

raghu-muskurate huye aur use chodna chahte ho ya nahi

raghu ki bat sun kar avi ka land khada ho jata hai aur uski aankho ke samne bas uski didi ka hi chehra ghumne lagta hai

avi- ha raghu bhaiya mai use chodna bhi chahta hu, mai use bahut pyar karta hu raghu bhaiya bas tum dua karo ki vah jaldi se meri banho mai aa jaye

raghu- mai apne dost ke liye sachche dil se kamna karta hu ki tumhe jaldi hi tumhara sachcha pyar hasil ho jaye

avi- achcha raghu bhai ab mai jata hu phir aaunga

raghu- avi bhaiya aise hi aa jaya karo tum aate ho to bada achcha lagta hai

avi- kyo nahi raghu bhaiya, achcha ab mai jata hu phir milenge

raghu-achcha avi bhaiya phir aana

avi sidha apne ghar ki aur chal deta hai aur uska dil apni didi ko jald se jald dekhne ke liye machalne lagta hai

vah ghar pahuchta hai aur darwaja bajata hai thodi der bad dimple darwaja khol kar

dimple-kaha gaya tha

avi- bas yahi pas mai hi tha didi

dimple- bol ke nahi ja sakta tha, mai andar thi aur tu chupchap chala gaya

avi- muskurate huye dimple ke gal ko apne hantho se chukar apne hantho ko apne muh se chumta hua, didi tum gusse

mai bahut khubsurat lagti ho aur phir avi ghar ke andar aa jata hai aur dimple apna muh phade use dekhti rahti hai phir

mand-mand muskurate huye wapas darwaja laga deti hai, aur vapas aakar avi ke pas aakar beth jati hai

avi dimple ko ghur kar dekhne lagta hai aur dimple uski aur dekh kar

dimple-aise kya dekh raha hai

avi- muskurate huye uska hath pakad kar, apni khubsurat didi ko dekh raha hu

dimple- apna hath chudate huye, tujhe aur koi kam hai mujhe dekhne ke alawa

avi- didi ek bat bolu

dimple- kaun si bat

avi- uske galo ko apne hantho se chukar, tum mujhe bahut achchi lagti ho

dimple- muskurakar mujhe lagta hai tu ek do din se pagal ho gaya hai

avi- dimple ke samne hi uske bhare huye badan par najar marte huye uski banho mai apni ungli upar se lekar niche ki aur

chala kar, jiski itni khubsurat didi ho vah pagal nahi to kya hoga

dimple-muskura kar uthte huye, mai ja rahi hu tu beth yaha

avi-apni didi ka hath pakad kar apni aur khichta hai aur vah ek dam se uski god mai girte huye beth jati hai aur phir jaldi

se uthne ki koshish karti hai aur avi uska hath pakad kar, didi kaha ja rahi ho

dimple- apni ankhe dikha kar kahdi ho jati hai aur avi tu pagal ho gaya hai yah kya kar raha hai

avi -uska hath pakad kar didi mai tumhari puppy lena chahta hu

dimple- apna hath chuda kar, chod mujhe aur muskurate huye jane lagti hai aur palat kar avi tu sachmuch pagal ho gaya

hai

avi- bethe-bethe muskurata hua, didi please ek puppy de do na

dimple- muskurate huye palat kar bada aaya puppy lene wala aur apne bedroom mai ghus jati hai

avi use dekh kar muskurata rahta hai aur phir thodi der bad hi dimple vapas bahar aati hai aur avi ko dekh kar muskurate

huye kichan mai chali jati jai aur phir vapas aakar avi ke samne beth kar ek book utha kar padhne lagti hai, avi usko

dekh kar muskurata hai aur dimple bhi use dekh kar muskurane lagti hai, avi kuch der tak dimple ke khubsurat chehre ko

dekhta rahta hai phir kuch soch kar didi chalo market chale

dimple- magar kyo

avi- tum bhul gai papa ne kaha tha ki mobile kharid lena

dimple- ha kaha to tha par

avi- uska hath pakad kar uthate huye jaldi utho na

dimple- ab jara ruk ja tere sar par to ek dam se bhut sawae ho jata hai, mujhe apne kapde to change karne de

avi- achcha thik hai chalo jaldi kar lo

dimple- uth kar apne room ki aur jati hai aur avi uske piche-piche room mai pahuch jata hai, dimple apne aap se jor se

batiyate huye kya pahnu, kya pahnu

avi- didi jeans aur tshirt pahan lo

dimple- muskura kar chal tu kahta hai to pahan leti hu aur phir dimple apna jeans aur tshirt nikal kar avi ko dekhti hui tu

yaha khada-khada mera muh kya dekh raha hai mujhe kapde pahnna hai

avi- to pahno na jaldi se

dimple- use ghurti hui tu bahar jayega tab na pahnugi

avi- uski bat ko sun kar uske jism ko apni nigaho se upar se niche tak dekhta hua uski aankho mai dekhta hai aur dimple

uski najro ko dekhne lagti hai aur avi apni didi ki aankho mai dekhta hua dhire-dhire uski aur jane lagta hai dono ke

chehre par serious bhav the lekin dono ki najre bina palak jhapkaye ek dusre ki aankho mai dekh rahi thi, avi jaise-jaise

dimple ke karib ja raha tha dimple kuch bechain hoti ja rahi thi aur avi jab uske ek dam se karib pahuch jata hai to

dimple ki sanse kuch tej ho jati hai,

dono ek dusre ke bilkul karib khade huye ek dusre ki aankho mai dekhte hai tabhi

avi- uske gore galo par apna hath pher kar sahlata hua, didi jab tum mujhe apni aisi nigaho se dekhti ho to mera dil karta

hai ki mai tumhe, aur phir avi kahte huye ek dam se ruk jata hai aur palat kar room se vapas aane lagta hai aur dimple

ek but ki tarah use dekhti rahti hai aur apne man mai khud hi kuch sawal karne lagti hai aur apne aap ko hi dhokha dete

huye yah sochti hai ki pata nahi avi aisi bate kyo kar raha hai jabki uska dil sachchai ke kaphi karib hota hai aur vah avi

ki harkato ko samajhne lag jata hai, avi ki bato par dimple ko kabhi gussa ata hai aur kabhi use uski harkate achchi bhi

lagne lag jati hai, depend karta hai ki uska man kaisa hai,

dimple jaise hi bahar aati hai avi usko dekh kar sann rah jata hai kyo ki vah dimple ko pahle bahut kam tshirt aur jeans

mai dekh paya tha, unka timing hi aisa tha ki avi subah se sham tak gayab rahta tha aur dimple kabhi jeans tshirt college

pahan kar jati bhi to sham ko aane ke bad utar deti thi,

dimple ka bhara hua badan aur khubsurati dekh kar avi ek dam se pagal ho jata hai aur jab uski najre dimple ke kase

huye mote-mote doodh jo tshirt se saf najar aa rahe the ko dekh kar ek dam se uske mote-mote doodh ko ghurne lagta

hai aur dimple bade ashcharya se uski najro ko apne doodh par gadaye dekh kar man hi man bahut gussa hoti hai par

pata nahi avi ko kuch kah kyo nahi pati hai, avi isi vajah se bina dare jab tak uska man karta hai dimple ke doodh ko

niharta rahta hai aur phir aakhir mai dimple ko hi majburan use kahna padta hai, avi kya dekh raha hai ab chal bhi

avi- uski aankho mai khush hota hua dekh kar, didi tum nahi janti tum kitni khubsurat ho

dimple- uske muh se apni tarif sun kar pata nahi andar hi andar kuch khush ho jati hai aur chal ab jyada jhuthi tarif mat

kar meri aur yah le lock darwaje par laga de

avi uske hath se lock le leta hai aur dimple uske side se ghar ke bahar jane lagti hai aur avi jab apni didi ke gadraye huye

mote-mote chutado ko jo jeans mai puri tarah kase huye ek alag hi andaj mai thirak rahe the ko dekhta hi rah jata hai

aur dimple thoda aage jakar uski aur palat ke dekhti hai to avi ko apne chutado ko dekhta pakar apne chehre par gussa

late huye apne man mai avi tu kitna ganda hai apni sagi bahan ko hi is tarike se dekh raha hai pata nahi dusri ladkiyo ke

sath kya karta hoga,

avi- door ko lock karke dimple ke pas aakar uske gale mai hath dal kar chalo didi

dimple- uska hath hatate huye, usko ghur kar sekhti hui bahar to kam se kam tamij se chalo

avi- muskurata hua, tum to aisi bat kar rahi hu didi jaise mai ghar mai tumhare sath badtamiji karta hu

dimple- apne man mai, to kaun sa mujhe tamij ki najar se dekhta hai, teri harkate mai barabar do din se dekh rahi hu

apne aap ko jyada hi smart samajhne laga hai,

dimple- are avi koi riksha to lekar aa

avi- are didi chalo panv-panv hi chalte hai ghumna phirna bhi ho jayega

dimple- use ghur kar dekhti hai aur avi mujhe panv-panv nahi jana hai tu jaldi se koi riksha le kar aa

avi- achcha baba gussa kyo karti ho kaho to tumhe apni god mai utha kar le chalu

dimple- jyada smart mat ban aur koi rikshe ko hath de aur avi ek rikshe ko rokta hai aur phir dono usme swar ho jate hai

avi aage ki aur jhuk kar dimple ke khubsurat mujhde ko ghurne lagta hai aur dimple bilkul karina kapoor ki style mai use gusse se ghur kar dekhne lagti hai

tabhi avi ki najre apni didi ke mote-mote tshirt mai kase huye doodh par chali jati hai aur dimple use apne doodh ko

ghurte huye dekh leti hai aur apne hath aage lejakar dono hantho ko apne mote-mote doodh par bandh leti hai aur

samne dekhne lagti hai, avi uske gusse se lal chehre ko dekhta rahta hai aur apne man mai sochta hai didi tum nahi janti

tumhare is gusse se lal chehre ko chumne ke liye mai kitna tadap raha hu, lagta hai mai tumhari mohabbat mai pagal ho

jaunga,

dimple- avi ko lagatar apni aur ghurte dekh kar, dhire se kahti hai, avi kam se kam yaha to mujhe is tarah mat ghur

avi- kyo ghar mai, mai tumhe gurta hu kya

dimple- usko aankhe dikhati hui jyada smart mat ban

avi- muskurakar didi kahi aisa hota ki yah riksha jindagi bhar aise hi chalta rahta aur mai tumhe aise hi bethe-bethe

dekhta rahta,

dimple- uski bat sun kar apni muskan rok nahi pati hai aur, avi tu kitni hi koshish kar le teri koi bhi ichcha kabhi puri

hone wali nahi hai,

avi- didi meri jindagi mai chahe koi bhi ichcha puri na ho, par bas ek ichcha mai chahta hu ki jarur puri ho jaye

dimple- usko dekhti hui kaun si ichcha

avi- apne chehre par serious bhav lata hua dimple ki aankho mai dekhne lagta hai aur dimple kuch der tak uski aankho

ko dekhti hai aur avi jaise hi apni najre ek bar apni didi ke mote-mote doodh par dal kar vapas dimple ki aankho mai

dekhta hai, dimple kuch jhepte huye apni najre dusri aur karke bahar dekhne lagti hai,

avi apne shirt ki jeb se pen nikalta hai aur apni najre niche karke apni hatheli ko kholta hai aur dimple uski aur dekh kar

uski hatheli ko dekhne lagti hai, avi pen se apni hatheli par ek khadi line khichta hai aur phir pen se khadi line ke upar

ke hisse se ulta C banata hua use us line ke niche ke hisse se mila kar D bana deta hai aur dhire se apni mutthi band

karke jaise hi dimple ki aur dekhta hai dimple ek dam se apna muh dusri aur ghuma leti hai aur uska dil jor-jor se

dhadakne lagta hai, avi dimple se vapas apni najre hata kar apni mutthi ki aur dekhta hai aur dimple usko apna muh

samne kiye huye uski hatheli ki aur tirchhi najro se dekhti hai aur avi us D ko apne pen se gahra karta hua uske aage i

love u likh kar vapas apni mutthi ko band karke jaise hi dimple ki aur dekhta hai dimple ki sanse ek dam se chadh jati hai

aur vah apne muh ko dusri aur ghuma kar apni aankhe band kar leti hai,

kramashah........