जिस्म की प्यास compleet

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raj..
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Re: जिस्म की प्यास

Unread post by raj.. » 15 Oct 2014 10:50

ललिता उठ कर बैठी और रिचा ने उसको बताया कि ट्यूशन वाली मॅम आएँगी घंटे के अंदर तो जाके

नहा के ताज़ा होले.. ललिता ने बॅग में से कपड़े निकाले और उन्हे लेके नहाने चली गयी.. उसने अपने

सॉफ कपड़े टाँग दिए और जब वो अपने कपड़े उतार ने लगी तो उसने फर्श पे रिचा के गंदे कपड़े पड़े हुए देखे..

ललिता ने रिचा की गंदी पैंटी को देखा तो वो हद से ज़्यादा बड़ी लग रही थी मानो किसी बंदे का कच्छा हो..

ललिता ने उसको वापस फेका और नहाने लग गयी.. फिर उसने अपने गीले बदन को सॉफ किया और कपड़े पहेन्ने लग गयी.. उसने ब्लॅक ब्रा और पैंटी पहेनली और उसके उपर बिना बाजू के गुलाबी टॉप और नीचे काला पाजामा..

ललिता को टाय्लेट के बाहर कोई नहीं दिखा तो आराम से अपने बाल बनाने लगी.. फिर दोनो लड़कियों ने नाश्ता करा और ट्यूशन पढ़ने लगे..

भोपाल में नारायण अपने कमरे में अकेला बैठा हुआ था और उसके दूसरे वाले छोटे केबिन में

रश्मि काम में व्यस्त थी.... अबसे कुच्छ दिनो के लिए उसको खाली पड़ा रहना था क्यूंकी उसकी बेटी दिल्ली चली गयी थी... नज़ाने कितनी सदिओ बाद उसे ऐसा मौका मिला था और इस मौके वो फ़ायदा भी उठाना चाहता था मगर

उसे समझ नही आ रहा था कि कहाँ शुरू करा जाए.... कल की रात उसने जब घर पे अकेले बिताई तो वो

खुश तो काफ़ी था मगर घबराहट भी उसके दिल पर छाई थी... या तो ये कहिए कि वो काफ़ी डरा हुआ था....

नारायण ने सुधीर को अपने कॅबिन में बुलाया और उसे बिनति करली कि वो उसके कुच्छ दिनो के लिए रहने आ जाए...

सुधीर भी खुशी खुशी आने के लिए राज़ी हो गया ताकि वो अपने बॉस का ख़ास आदमी बन जाए..

दोनो ने स्कूल के बाद पहले सुधीर के घर उसका समान लेने का प्लान बनाया और फिर घर जाने का....

नारायण को खुशी इस बात की भी थी कि सुधीर को खाना बनाना भी आता था तो अब उसे रोज़ रोज़ उसे बाहर का खाना नहीं खाना पड़ेगा....

जब दोपहर में छुट्टी हुई तो नारायण अपने कॅबिन में बैठा हुआ सुधीर का इंतजार करने लगा कि कब वो

आएगा और वो घर के लिए रवाना होंगे... उसका मोबाइल भी बिज़ी आ रहा था तो वो उठ कर सुधीर को ढूँढने निकला.... सारा स्कूल खाली हो चुका था बस एक दो क्लर्क ही नज़र आ रहे थे... अतः नारायण ने कॅंटीन की तरफ देखा कि

सुधीर और रश्मि दोनो साथ में खड़े चाइ पी रहे थे... दोनो एक दूसरे के साथ काफ़ी खुश लग रहे थे...

नारायण को समझ नही आया क्यूंकी स्कूल के वक़्त दोनो ने एक दूसरे से ढंग से बात भी कभी नहीं

करी और अभी यहाँ दोनो के तेवर ही अलग थे... सुधीर ने कयि बारी रश्मि के कंधे को भी छुआ जिसका

रश्मि ने कुच्छ जवाब सुधीर को छुते हुए दिया.... सुधीर वापस अपने कॅबिन की ओर जाने लगा...

वो सोचने लगा कि वैसे तो बड़ी हिट्लर जैसी बनती है मगर सुधीर के सामने उसको क्या हो गया था... कुच्छ देर बाद सुधीर उसके कॅबिन में आया दोनो स्कूल से रवाना हो गये....

दोपहर के वक़्त दिल्ली में शन्नो घर पे अकेली बैठी हुई थी... उसको बुआ से मिलने के लिए जाना था मगर कल

रात के बाद उसके जाने का बिल्कुल भी मन नही था.... डॉली अपने कॉलेज गयी थी अपना अड्मिशन कार्ड

लेने के लिए और चेतन अपने स्कूल गया हुआ था.... शन्नो कल रात के बारे में सोच सोचके परेशान थी कि

कैसे एक भाई बहन के बीच ऐसे रिश्ते भी पनप सकते है... उसे सारी ग़लती डॉली की लग रही थी क्यूंकी

एक बड़ा भाई अपनी छोटी बहन को बहला फुसला सकता है मगर एक बड़ी बहन होने के नाते उसको अपने छोटे

भाई को समझाना चाहिए था... फिर फोन की घंटी बजने लगी और शन्नो अपनी सारी परेशानिओ को भूल

के हॉलो मॅन की आवाज़ सुनने के लिए बेताब हो गयी...

"हेलो मेडम... कल मेरेको बड़ा मिस करा आपने" हॉलो मॅन अपनी अजीब सी आवाज़ में बोला... उसकी आवाज़ में ही गन्द्पन छलक्ता था....

शन्नो बोली "मैं बहुत बेताब हुई थी तुम्हारी आवाज़ सुनने के लिए" शन्नो सोफे से उठकर सीधा अपने कमरे

गयी

ये सुनके हॉलो मॅन हँसने लगा और बोला "तब तो आपकी चूत तो हद्द से ज़्यादा गीली होगी"

शन्नो बोली "थोड़ी सी है मगर तुम इसको और गीला कर दोगे" आज पहली बारी शन्नो इतनी गंदी भाषा में बोल रही थी शायद ये कल रात का असर था...

ये भाषा सुनके हॉलो मॅन का लंड भी जाग गया था... "हॉलो मॅन ने उससे कहा चलो अपने कपड़े उतारो और धंधे पे लग जाओ..."


raj..
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Re: जिस्म की प्यास

Unread post by raj.. » 15 Oct 2014 10:51

शन्नो आज सोफे पे ही बैठके अपने आपसे खेलने लगी.... उसकी चूत और गान्ड दोनो में लंड घुसे पड़े थे.... उसके मुँह से धूक टपक रहा था और उसके हाथ चुचिओ को मसल रहे थे....

हॉलो मॅन मस्ती में बोला "क्या आपकी बेटियो की भी जिस्म की प्यास आप ही के जितनी है" शन्नो ने उसको कुच्छ नही बोला... मगर हॉलोमॅन बोला "कहीं लंड की तलाश में अपने बेटे से नहीं चुद्वा लेना" शन्नो ये सुनके तुरंत बोली

"प्लीज़ में बेटे के बारे में कुच्छ नही बोलो"

हॉलो मॅन बोला "बेटियो के बारे में बोला तो कुच्छ नही मगर बेटे का सुनके इतनी आग लग गयी.... और जैसे ही बेटे का

ज़िक्र हुआ आपकी सिसकिया तेज़ क्यूँ होने लग गयी... कैसी मा हो अपने बेटे से ही चुदवाने के ख्वाब रखती हो"

ये बातें सुनके शन्नो की चूत और गीली हो गयी... उसे याद आ गया कि उसके बेटे का कितना बड़ा लंड है और वो अपनी बड़ी बहन को भी उसे चोद चुका है... हॉलो मॅन अब बस चेतन का नाम लेकर ही शन्नो को और गरम कर रहा था....

शन्नो पूरी टूट चुकी थी... उसका अंग अंग हवस में डूब गया था....

मगर फिर घर का दरवाज़ा खुल गया और एक आवाज़ आई "मम्मी"

शन्नो को एहसास ही नहीं हुआ कि दोपहर के दो बज गये थे और उसके सामने चेतन अपना स्कूल का बस्ता लिए

खड़ा था.... चेतन की आँखें फॅटी की फॅटी रह गयी थी... उसके सामने उसकी मम्मी का पूरा फूला हुआ

गरम बदन एक गोस्त की तरह रखा हुआ था... शन्नो ने अपनी जाँघो को छुपाना चाहा मगर उसकी चूत

और गान्ड में घुसे लंड ने ऐसा होने नही दिया...

शन्नो के पास फोन देखते हुए चेतन बोला "आप ये क्या कर रहे हो... और ये फोन पे किससे बात कर रहे थे...

आपको शरम नही आती???"

बिना सोचे समझे अपने आपको बचाने के लिए शन्नो बोली "तुम क्या कर रहे थे कल रात अपनी बहन के साथ"

ये सुनके चेतन को हल्का सा झटका लगा और फिर वो बोला "तो आपको पता है उस बारे में"

चेतन ने अपने कंधे से बस्ते को नीचे गिराया और धीरे धीरे शन्नो की तरफ बढ़ा... शन्नो को हद से ज़्यादा शरम आ रही थी... वो अपने बदन को अपने हाथ से ढकने लगी मगर तब तक काफ़ी देर हो गयी थी... चेतन ने शन्नो की टाँगो को पकड़ा और सोफे पे बैठ उसके अंदर घुशे दोनो लंड की तरफ देखने लगा..

"चेतन तुम जाओ यहाँ से प्लीज़" शन्नो ने अपने बेटे से बिनती करी

शन्नो ने ज़ोर से चिल्लाया जब चेतन ने उस लंड को और अंदर घुसा दिया... शन्नो की टाँगें पूरी तरह चौड़ी हुईपड़ी

थी और उसका बेटा उसके नंगे बदन से खेल रहा था.... चेतन ने हाथ बढ़ाकर शन्नो के मम्मो को

छुआ तो उसकी चुचियाँ और भी सख़्त हो गयी... शन्नो ना चाहते हुए भी चेतन की इन हर्कतो से और गरम हो रही थी... केयी बारी वो चेतन को रोकने के लिए कहती मगर चेतन हर बारी और भी ज़्यादा आगे बढ़ जाता...

और फिर शन्नो की चूत में से लंड अपने आप निकला और एक नलके की तरह उस चूत ने सारा पानी चेतन की

टाँग पे डाल दिया... चेतन फिर अपने कमरे में चला गया और शन्नो सोफे पे पड़ी रही....

क्रमशः……………………….


raj..
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Re: जिस्म की प्यास

Unread post by raj.. » 15 Oct 2014 10:53

दोस्तो अब आगे की कहानी दीवाली के बाद पोस्ट कर पाउन्गा
दोस्तो आप सब को दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएँ
आप सब को दीपावली शुभ मंगलमय हो
आपका दोस्त राज शर्मा