खानदानी चुदाई का सिलसिला

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rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:35



मिन्नी का चेहरा सखी के थूक और सुजीत के भीगे हुए लंड से गीला हो चुका था. वो अब अपनी चूचिओ को दबाए हुए, गांद उठा उठा के अपनी चूत अपने ससुर से मरवा रही थी. गोरे बदन पे जगह जगह लाल निशान पड़ गए थे. बाबूजी ने अपनी स्पीड नही छोड़ी और जैसे ही गपगाप एक बार और सुजीत का लंड मिन्नी के मुँह में गया वो अपनी पिचकारियाँ छोड़ने लगे. वीर्य की धारे मिन्नी की चूत में बहने लगी. वो एक दम से चिल्ला उठी और झरने लगी. झरते हुए भी उसने सुजीत का लंड नही छोड़ा और अपने चेहरे पे उसे मलती रही. बाबूजी घुटनो के बल बैठे हुए उसकी चूत में रस डालते रहे. थोड़ी देर में उनका मुरझाया हुआ सॅटिस्फाइड लंड जब चूत से बाहर आया तो लपक के सखी ने उसे मुँह में भर लिया और चूसने और चाटने लगी. मिन्नी भाभी की चूत के रस और सुपादे के छेद से निकलता वीर्य उसके मुँह को बहुत स्वाद लग रहा था.

उधर संजय और राजू ने भी राखी की चूत और मुँह की अच्छी सेवा की थी. संजय ने अपना सारा वीर्य राखी की चूत में पिछे से ऊडेला था. और राजू का वीर्य उसके मुँह में था. अभी भी राखी संजय और राजू के बीच सॅंडविच बनी उनके लोड़ों से खेल रही थी. वो तीनो भी थक चुके थे और आके सबके साथ कार्पेट पे लेट गए.

करीब 10 मीं सुसताने के बाद राखी ने उठ के किचन से खाने का सामान लाना शुरू कर दिया. उसके साथ सखी और मिन्नी भी लग गई. सभी नंगे घूम रहे थे. थोड़ी देर में खाना लग गया और सभी लोग नंगे ही टेबल पे आ गए.

'' बाबूजी आपने एक बात नही बताई मिन्नी भाभी के बारे में. आपने इन्हे सबसे पहले राजू भैया के अलावा किस से चुद्वाया और कैसे ? और आपका नंबर कब लगा ?'' सखी ने फिर से चुलबुली बातें छेड़ते हुए पुछा.

'' अर्रे बेटी ये एक मज़ेदार बात है. तेरी भाभी जब राजू के साथ हनिमून पे गई तो इसने मेरा और मेरे दोस्त और उसकी बीवी का किस्सा राजू को बताया. राजू ने यही बात मुझे बताई. तब मैने राजू को बताया कि किस तरीके से मिन्नी ने उनको देख के अपनी चूत सहलाई थी. पूरी बात सुनके राजू समझ गया कि मिन्नी को 2 मर्दों का सीन पसंद है. इसने घर में मिन्नी को ब्लू फिल्म्स दिखाई जिसमे एक औरत 2 या ज़ियादा मर्दों से चुद रही थी. बस फिर क्या था एक दिन मिन्नी ने इसे कह दिया कि मुझे भी ऐसा करना है. जब ये बात राजू ने अगले दिन मुझे कही तो उस समय मिन्नी रात की ज़बरदस्त चुदाइ के बाद सो रही थी. मैने उसी समय राजू को मेरे साथ उसके रूम में चलने को कहा. सोई हुई मिन्नी उस समय बहुत सुन्दर दिख रही थी. इसके चूतर उपर की तरफ थे. राजू ने पिछे से इसकी चूत में लोडा पेला और ये उल्टी लेटे लेटे चूत मरवाने लगी. उसी समय मैं इसके मुँह के पास अपना लोडा लहराता हुआ पहुँच गया. अब नंगी तो ये थी ही और उपर से राजू से चुद भी रही थी. मस्ती में इसने ये नही देखा कि लंड किसका है और लगी चूसने. बाद में जब इसकी चूत चुदाई ख़तम हुई तो इसने उठ के मुझे देखा. उस दिन तो इसकी शरम देखने वाली थी. पर फिर मैने भी इसको जम के प्यार किया और इसकी सारी झिझक दूर कर दी. बस तब से वो दिन और आज का दिन ये मेरे लंड से कभी भी कहीं भी चुद लेती है. उसी रात हम चारों से इसे एक साथ चोदा था. अगले 3 दिन तक इसकी चूत सूजी रही.'' बाबूजी ने हस्ते हुए सारी बात कह डाली.

'' अर्रे वाह बाबूजी...आपकी ये बड़ी बहू तो बहुत ही छिनाल निकली...सॉरी भाभी मैं ऐसे कह रही हूँ ..पर सच में ये एक कॉंप्लिमेंट है. आप बुरा मत मानना.'' सखी बोली.

'' अररी बुरा क्यों मानूँगी. समझती हूँ तेरी बात. पर मुझे सबसे ज़ियादा खुशी इस बात की है कि बाबूजी घर में पहले मर्द थे इनके अलावा जिन्होने मुझे प्यार किया. आख़िर ये मेरा रेकॉर्ड बन गया पर्मनेंट. अपने पति के अलावा सबसे पहले अगर किसी ने मुझे लंड लगाया तो वो बाबूजी थे. और ये बात मैं हमेशा राखी को भी कहती हूँ...'' मिन्नी मुस्कुराते हुए और प्राउड फील करते हुए बोली. बोलते समय उसकी छाती आगे को निकली हुई थी और तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी.

उसकी बात सुन के बाबूजी, राखी और सुजीत मुस्कुरा दिए और राखी ने बाबूजी का लोडा हल्के से सहला दिया. उसका ये आक्षन देख के सुजीत को छोड़ के बाकी सब थोड़ा अचंभे में पड़ गए.

'' बाबूजी आप कुच्छ छुपा रहे हैं. और शायद राखी भाभी भी. बताइए ना क्या बात है.'' सखी ने एक बार फिर बात छेड़ी.

'' चलो पहले सब खाना समेट दो और फिर आ जाओ. आज लगता है कि सिर्फ़ कहानियाँ सुनने का दिन है. '' कहते हुए बाबूजी उठ के हाथ धोने चले गए. सब लॅडीस ने फटाफट खाना समेटा और वापिस ड्रॉयिंग रूम में आ गई. महफ़िल फिर एक बार जॅम गई. बाबूजी ने सोफा पे अपनी जगह ले ली और थोड़ी देर के लए सब मर्द अपनी अपनी पत्निओ के पास बैठ गए. राखी और सुजीत थोड़ा मुस्कुरा रहे थे. बाबूजी ने सबकी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए फिर राखी को देखा और उसे आँख मारी. राखी की घुंडिया एक दम तनी हुई थी. उसकी गोरी गोरी जांघों पे सुजीत का एक हाथ था. खुले बालों में वो मस्त दिख रही थी.

'' ह्म्‍म्म लगता है की सोने से पहले एक बार फिर से प्रोग्राम बन जाएगा. सखी तू बहुत शरारती है, अपने इस बूढ़े ससुर से इस उम्र में इतनी मेहनत करवाएगी. पहले जैसे कहानियाँ सुनाते सुनाते जोश आ जाएगा और फिर से मुझे कुच्छ करना पड़ेगा...'' बाबूजी मुस्कुराते हुए बोले.

'' बाबूजी आप बिल्कुल चिंता ना करें इस बार मैं आपको मेहनत नही करने दूँगी..आप बस मज़े लेना और सारी मेहनत मुझपे छोड़ देना.'' सखी ने बाबूजी के लंड पे कूदने का मंन बना लिया था.

'' तो सुनो फिर. बात उन दिनो की है जब मिन्नी घर में बड़ी बहू बन के आ चुकी थी. अब ये बेचारी घर में अकेली औरत और घर में 4 मर्द. वो भी मुश्टंडे... और उपर से हरिया हमारा नौकर. उसे भी जब मौका मिलता तो वो इसका स्वाद ले लेता था. तो ये बेचारी काफ़ी दिन तक सहती रही पर फिर एक दिन इससे रहा नही गया और जब मैं इसकी ले रहा था तो इसने मुझसे शिकायत की कि अब अकेले मुझसे घर नही संभलता. एक के बाद एक 4 भूखे लोगों की भूख कब तक मिटाउँगा आख़िर मेरा भी जिस्म है....मैं भी इंसान हूँ. भूखे भेड़िओ की तरह नोच देते हैं मुझे बाबूजी ये आपके 3नो बेटे. अब मैं सोच में पड़ गया की अब सुजीत का ब्याह भी हो जाना चाहिए.''

rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:35



'' पर परेशानी वही थी कि लड़की कैसी हो. पर ये सुजीत भी छुपा रुस्तम था. घर में ये अपनी भाभी से मज़े लेता था और बाहर राखी से. राखी और इसका चक्कर कॉलेज से था. मैने इसकी शादी के बारे में सोचा और इससे बात की. ये तो राखी का दीवाना था और इसे लगा कि कहीं वो इसके हाथ से निकल ना जाए. कहीं मैने अपनी मर्ज़ी से ढूँढ दी तो ये मना नही कर पाएगा. सो इस घबराहट में इसने मुझे सब कुच्छ बता दिया राखी के बारे में. तब मैने राखी की फोटो मँगवाई इससे. फोटो में राखी ने चुरिदार सूट पहना हुआ था. इसकी फोटो देख के मैं समझ गया कि ये हमारे खानदान में फिट हो सकती है. बड़े बड़े मम्मे और इसकी मोटी बढ़िया गांद देख के मेरा दिल फिसल गया. पर दुविधा वही थी क्या ये जितना सेक्सी दिखती है उतनी ही सेक्स की भूखी भी है ?? तब मैने सुजीत से डाइरेक्ट पुछा कि क्या इसने कभी राखी से संबंध बनाए ? इसने मुझे बताया कि रखी के साथ ये कई बार संभोग कर चुका था. पर हमेशा जल्दी का काम होता था. तस्सली से ये लोग सिर्फ़ एक बार होटेल में कर चुके थे. उस एक्सपीरियेन्स के बेस पे इसका कहना था कि राखी काफ़ी कामुक लड़की है.''

'' इसने मुझे ये भी बताया कि राखी इसके लिए केले चूस चूस के प्रॅक्टीस भी करती है. ये बात मेरे दिमाग़ में बैठ गई. मैने कहा कि मुझे रखी का टेस्ट लेना होगा तभी वो इस घर की बहू बनेगी. अब ये बात ये खुल के राखी से नही कर सकता था. सो मैने इसके साथ मिल के एक प्लान बनाया. एक रात इसने मिन्नी की जम के चुदाई की और उस रात अपने बदन से उसके रस की खुश्बू को सॉफ नही किया. अगले दिन ये राखी को मिलने बिना नहाए चला गया. इसने राखी के साथ बाहर घूमने का प्रोग्राम रखा और उसे एक सुनसान जगह पे ले गया. प्लान के मुताबिक मैं भी उस जगह पे मौजूद था. मेरे बताए अनुसार इसने पहले राखी को बहुत गरम किया और इसकी चूत चॅटी और फिर रखी से अपना लंड चुसवाना शुरू कर दिया. लंड मुँह में लेते ही रखी ने इसे कहा कि क्या तुम किसी को चोद के आए हो. अब उस समय राखी का सबसे बड़ा टेस्ट था. वो पुच्छ तो रही थी पर लंड को सहलाए और पूचकारे जा रही थी. सुजीत ने बहाना किया कि नही रात मूठ मारी थी और सॉफ नही किया था सो उसका वीर्य ही लगा हुआ है और सूख गया है. पर इसका शक दूर नही हुआ. स्वाद ले लेके ये लंड तो चूस्ति रही पर 2 बार और इसने पुछा. इधर सुजीत ने इसकी चूत में अपनी उंगलियाँ डाली हुई थी कुच्छ इसी तरीके से जैसे कि मेरी जुड़ी हुई उंगलियाँ हैं. प्लान के मुताबिक मैं भी कपड़े उतार के नज़दीक ही छुप गया. जब सुजीत ने देखा कि मैं रेडी हूँ तो इसने राखी से कहा कि मैने रात भाभी को चोदा था और ये उनकी चूत का रस है जो लंड पे चिपका है. एक बार के लिए तो राखी दंग रह गई और पिछे को हटी पर सुजीत ने भी चालाकी से उसकी चूत में उंगलियाँ डाले रखी. ये कुतिया की तरह थी और सुजीत पेड़ से पीठ लगाए बैठा था. राखी ने इसे 2 - 3 गालियाँ दी और गुस्सा दिखाया. पर इससे पहले कि ये ज़ियादा कुछ कहती सुजीत ने इसे एक चुम्मा दे डाला और इसकी चूचियाँ भींच दी. तुम सबको पता है कि इसकी गीली चूत का रास्ता इसके मम्मो से जाता है. बस ये मस्ती में लहरा उठी. चूत में उंगली और घुंडीयों को मसल्ते हुए हाथ और बिना कुच्छ और बोले इसने फिर मस्ती में सुजीत का काला लोडा मुँह में भर लिया.''

'' सच कहूँगा आजतक मैने ऐसा मादक नज़ारा नही देखा. खुले आसमान में दिन के समय ये पूरी गांद होला हिला के चूत में उंगली ले रही थी और इसकी बुर पनिया रही थी. जंघें बिल्कुल रस से तरबतर. मम्मे भारी और सूट के टॉप से आधे बाहर निकले हुए और मुँह में इसका काला नाग. कसम से मैं रुक नही सकता था. पर अभी भी कुच्छ बाकी था. सुजीत ने इसे झूठी कहानी सुनाई कि कैसे भाभी को एक साथ 2 मर्द चाहिए. इसने झूठ बोला कि राजू मिन्नी को अकेले संभाल नही पाता इसलिए कभी सुजीत तो कभी संजय राजू और मिन्नी के साथ सोते हैं. ये सुनते ही राखी के बदन में आग लग गई और इसने लंड के चूपे बढ़ा दिए. थूक लगा लगा के ये ऐसे चूस रही थी कि जैसे किसी मरने वाले को एक आख़िरी खाना नसीब हो रहा हो. ''

'' इसकी ये हालत देख के सुजीत ने 3 बार इसकी चूत से उंगली निकाली और मुँह में लेके चॅटी और मैं इसका इशारा समझ गया. मैं नंगी अवस्था में रखी के पिछे आ गया और सुजीत की जगह अपनी जुड़ी हुई उंगली इसकी चूत में पेल दी. इससे ज़ियादा होश तो था नही सो ये मज़ा ले लेके लंड चूस्ति रही. मैने भी मौके को देख के अपना हथियार तैयार किया और इसकी चूत में पेल दिया. तभी सुजीत ने इसको उपर उठा के अपने होठ इसके मुँह पे लगा दिए. सुजीत ने इसके कंधे पकड़े हुए थे और मैने इसके चूतड़. मुँह तो बूँद था ही सो ये चीख भी नही पाई. मैने तबाद तोड़ 10 - 12 धक्के इसकी गीली चूत में लगा दिए. सारे स्ट्रोक्स लंबे लंबे थे ताकि इसकी चूत को अंदर तक घर्षण मिले और ये और भी गरमा जाए. तभी इसने ज़बरदस्ती अपने को सुजीत से छुड़ाया और मूड के मेरी तरफ देखा. इतने में सुजीत ने इसके चूचे बाहर निकाल के मसलना शुरू कर दिया. इसके मुँह से एक लंबी सिसकारी निकली और इसने मेरी तरफ देखते हुए मुँह खोला और मैने अपनी जुड़ी हुई उंगली जो कि इसके रस से भीगी थी इसके मुँह में डाल दी. ये चूतड़ हिला हिला के चुद्ने लगी और मेरी उंगली को चूसने लगी. फिर इसने झुक के सुजीत का लोडा वापिस मुँह में ले लिया और दुगने जोश से चूसने लगी. मेरे से अब रहा नही जा रहा था और मैने सुजीत को इशारा किया. सुजीत समझ गया और लगा इसकी चुचियो से खेलने. इसकी चूचिओ को मसल मसल के इतना गरमा दिया कि इसने कुच्छ ही देर में मेरे लंड पे रस की फ़ुआर कर दी.''

जैसे ही ये झर के हटी मैने और सुजीत ने इसे संभलने का मौका नही दिया और एक साथ खड़े होके इसके खुले मुँह पे मूठ मारना शुरू कर दिया. ये बड़ी उतावले पन से मुँह खोल के बैठ गई और अपनी चूत से खेलती रही. मैने और सुजीत ने एक साथ इसके मुँह पे पानी छोड़ा. एक तरफ से वो पिचकारियाँ मार रहा था और दूसरी तरफ से मैं. फिर मैने पिचकारी छोड़ते छोड़ते इसके मुँह में लंड ठूँसा और चुस्वाया. फिर सुजीत ने इसके चेहरे गालों और माथे पे लगा वीर्य का मिश्रण अपने लंड से समेट के इसके होठों पे लगाया. सच में उस समय इसमे पूरी रांड़ बहू बनने के लकछन मुझे दिखाई दे गए. जब ये सुजीत का लोडा चूस रही थी और हम दोनो के मिले जुले वीर्य का स्वाद ले रही थी मैं वहाँ से खिसक गया और घर आ गया.''

'' कुच्छ दिन बाद मैने इसकी फोटो घर में सबको दिखाई और कहा कि ये हमारी दूसरी बहू बनेगी. मिन्नी को यकीन नही हुआ और इसने मुझे पुछा कि क्या ये हमारे घर के माहौल में शामिल हो पाएगी. तब मैने कहा कि मैं एक पारखी हूँ और हीरा पहचानता हूँ और ये भी कहा कि ये हम सबसे ज़ियादा तुम्हे खुश रखेगी (आख़िर कार मिन्नी का रस चाट चुकी थी और उसका स्वाद ले चुकी थी)''
क्रमशः.................................


rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:36





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Sakhi ke jharne ka time ho raha tha. Uski nipples pe Sujit ke daant bahut achhe lag rahe the. Sujit bhi bich bich men fanfana raha tha. Lagta tha ki woh bhi jaldi jharega. Sakhi ne apni taange uski kamar ke aas paas lapet li aur uski pith pe apne haath pherne lagi. Apni aankhen moonde woh masti le rahi thi. Aaj use ek ajeeb sa sukoon mil raha tha. Naa jaane kyon uske man men ek khushi thi. Shayad islie ki ab use aage se birth control pills nahi khaani parengi. Use ab apne hone waale bachhe ka khyaal aa raha tha. Sujit bhaiyaa ki chudaai se use lag raha tha ki woh bahut saara paani chhorenge. Kya pata uske bachha thher jae....???? Sabse chhotti bahu sabse pehle ma ban jae...masti aur unmaand se ab uska badan akadne laga aur bina koi awaaz kie woh jharne lagi.......ek ke baad ek uski choot ne kai baar ras chhora.... phuchhhh phuccchhhhh ki awaaz ek dum se bad gai....lund aur bhi bhig chuka tha...choot ke paani ki chiknaai aur naram choochion pe kade kade nipple choosne ka mazaa...uspe Sakh ke naram haath uski gaand ki maang pe chalte hue.......

'''ooooooohhhhhh sakhiiiiiiiii.............ye leeee......ooooooohhhhhhhhh''''' aur Sujit jharne laga. Kuchh der pehle hi woh Minni ki choot men jhara tha par ab phir uska lund lambi lambi pichhkaarian maarne laga. Sakhi choot men ras ki phhuaar paate hi dhanya ho gai aur ek baar phir se jharne lagi. Usne apni choochie se Sujit ko hata ke uske saath jubaan lada di. Dono jharte hue ek doosre ko choosne lage. Badan se badan lipat gaya... mutthh aur chootras ka mishran jaanghon ke saath behne laga. Sujit ka poora wajan Sakhi ke naajuk badan pe tha aur bajuen uski peeth ko ghere hue thi. Chhatti se mummen chpke pade the. aur isi position men ek doosre ko halke halke chumban die jaa rahe the. Kareeb 2 min tak Sujit ka lund andar dhansa raha aur phir dhire dhire sikudte hue bahar nikal aaya. Thakaan se nidhaal dono ek doosre ki bagal men lete hue Babuji ko Minni ki sikaai karte hue dekhne lage.

Babuji Minni ki choot men zabardast dhakke lagae ja rahe the. Minni ke chootar aadhe hawa men the aur woh siskian le rahi thi. Uske Bagal men lete hue Sakhi ne uski chochion se khelna shuru kar dia. Sakhi ki taango ke beech hath pherte hue Minni ne uska aur Sujit ka ras choot se kureda aur chaatne lagi. Babuji ki raftaar lagataar badti ja rahi thi. Unke poore chehre pe pasina tha jo ki Minni ke pet pe tapak raha tha. Minni bhi jharne ke kareeb thi. Sakhi ne jhuk ke uski choochie ko munh men bhar lia aur zor zor se choosne lagi. Babuji ke dhakke itne tez the ki use choochie munh men rakhne men dikkat ho rahi thi. Sujit bhi thora khisak ke apni badi bhabhi ki doosri choochie pe munh maarne laga. Uska lund phie se ubhar raha tha. Uska khada hota hua lund Sakhi ne dekha aur Sujit ko lund se pakar ke Minni bhabhi ke munh ke nazdeek kar dia. Sath hi woh bhi Minni bhabhi ke munh ke nazdeek apna chehra le gai. Babuji ne ek baar nazar utha ke dekha to unka josh aur bad gaya. Sakhi kabhi Minni ko kiss karti to kabhi Sujit ke kaale lund ko choosti thook laga ke aur phir Minni ke munh men laga deti.

Minni ka chehra Sakhi ke thook aur Sujit ke bheege hue lund se geela ho chuka tha. Woh ab apn choochion ko dabaye hue, gaand utha utha ke apni choot apne sasur se marwa rahi thi. Gore badan pe jagah jagah laal nishaan pad gae the. Babuji ne apni speed nahi chhori aur jaise hi gapagap ek baar aur Sujit ka lund Minni ke munh men gaya woh apni pichkaarian chhorne lage. Mutth ke dhaare Minni ki choot men behne lage. Woh ek dum se chilla uthi aur jharne lagi. Jharte hue bhi usne Sujit ka lund nahi chhora aur apne chehre pe use malti rahi. Babuji ghutno ke bal baithe hue uski choot men ras daalte rahe. Thori der men unka murjhaya hua satisfied lund jab choot se bahar aaya to lapak ke Sakhi ne use munh men bhar lia aur choosne aur chaatne lagi. Minni bhabhi ki choot ke ras aur supade ke chhed se nikalta veerya uske munh ko bahut swaad lag raha tha.

Udhar Sanjay aur Raju ne bhi Rakhi ki choot aur munh ki achhi sewa ki th. Sanjay ne apna saara veerya Rakhi ki choot men pichhe se udela tha. Aur Raju ka muth uske munh men tha. Abhi bhi Rakhi Sanjay aur Raju ke beech sandwich bani unke lodon se khel rahi thi. woh teeno bhi thak chuke the aur aake sabke saath carpet pe late gae.

Kareeb 10 min sustaane ke baad Rakhi ne uth ke kitchen se khane ka saamaan laana shuru kar dia. Uske sath Sakhi aur Minni bhi lag gae. Sabhi nange ghoom rahe the. Thori der men khana lag gaya aur sabhi log nange hi table pe aa gae.

'' Babuji aapne ek baat nahi batai Minni bhabhi ke baare men. Aapne inhe sabse pehle Raju bhaiya ke alawa kisse se chudwaya aur kaise ? Aur aapka number kab laga ?'' Sakhi ne phir se chulbuli baaten chherte hue puchha.