खानदानी चुदाई का सिलसिला

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rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:38



जब व्यापारी की बीवी और साली वापिस आए तो हरिया के लिए मौके कम हो गए. पर हरिया को तब तक मिन्नी की चूत का स्वाद लग चुका था. हां मिन्नी की चूत उसे कम ही मिलती थी पर फिर भी वो काम चला रहा था. कम्मो भी वापिस चूत चूत के खेल से खुश थी. पर तभी उस व्यापारी की विधवा बहेन के लिए एक अच्छा रिश्ता आया और जल्दी जल्दी में उसकी शादी हो गई. कम्मो एक बार फिर अकेली पड़ गई. पर जैसा कि कहते हैं कि जहाँ चाह वहाँ राह. बहेन की शादी के कुच्छ दिन बाद जब व्यापारी अपनी बीवी की सिकाई कर रहा था तो कम्मो ने उसकी साली को अपने जोबन से खेलते हुए देखा. कम्मो की तो जैसे लॉटरी निकल पड़ी और उसे अपने पुराने दिन याद आ गए. कम्मो ने जल्दी ही उस साली के साथ भी समलैंगिक संबंध बना लिए. साली चूकि लंड के खेल से बिल्कुल अंजान थी सो उसका चूत चूत के खेल में मन ज़ियादा अच्छे से लगा. कम्मो को जैसे स्वर्ग मिल गया. जवान लड़की उसकी चूचियो को चूस्ति तो कम्मो की चूत के धारे रुके नही रुकती थी. एक बार उसकी प्रेमिका ने उससे अपनी चुदाई की बात कही. जोश में आके कम्मो ने हरिया को निमंत्रण दे डाला. हरिया भी कहाँ मौका छोड़ता. उसने भी साथ दिया और साली की कुँवारी चूत पे अपने लंड की मोहर लगा दी. साली को तो जैसे जन्नत मिल गई. लंड का स्वाद चूत को लगते ही वो पागल हो गई. हरिया से 2 बार और चुद्ने के बाद उसने अपने कॉलेज के दोस्तों से संबंध बनाने शुरू कर दिए. कम्मो के साथ अब वो कट कट के रहने लगी. कम्मो भी इस बात को कब तक संभालती सो उसने एक दिन साली के साथ ज़बरदस्ती की. शायद ये सोचना मुश्किल है पर उस दिन कम्मो ने साली का रेप किया. हालाँकि अंत समय तक साली भी उसके मुँह में झरी पर उसको एक नौकरानी के हाथों अपना रेप बेइज़्ज़ती लगा और उसने कुच्छ दिनो में कम्मो को काम से निकलवा दिया.

इधर बाबूजी के घर में काम करते हुए कम्मो को 3 साल हो गए थे. राखी भी घर में बहू बन के आ चुकी थी. हरिया का देहांत हो चुका था. अब कम्मो के लिए लंड चूत और चूत चूत के खेल कम हो गए थे. बच्चों की ज़िम्मेवारियाँ और पति की सेवा करते करते वो थक जाती थी. इसी दौरान बाबूजी के यहाँ से उसे पर्मनेंट नौकरी का न्योता मिला. सुबह 8 बजे से लेके शाम 4 बजे तक उसे घर के काम देखने थे. सॅलरी भी अच्छी थी सो उसने बाकी सब घर छोड़ के बाबूजी के यहाँ ही नौकरी कर ली. उसके सामने सामने घर में तीसरी बहू भी आई. सेक्स के मामले में उसे हरिया काका का लंड बहुत याद आता था. पर मजबूरी में वो सिर्फ़ अपने पति और उसके एक दोस्त के साथ ही गुज़ारा कर रही थी. पति का दोस्त कभी कभी शहेर से आता तो उसको 2 -3 घंटे जम के चोद्ता. बाकी समय या तो वो अपनी मुनिया सहला लेती या पति से सेक्स कर लेती.

जब से कम्मो ने बाबूजी के यहाँ काम शुरू किया था उसे पैसे की कमी नही हुई. काम वो अच्छे से करती थी, हाथ में सफाई भी थी और देखते देखते उसके कपड़े और रंग ढंग बदलने लगे. अब वो पूरे रूप से नौकरानी नही लगती थी. किसी मध्यम वर्ग की महिला लगने लगी थी. सखी के घर में आने के बाद से घर का माहौल काफ़ी बदल गया था. अब घर में हमेशा चहक रहती थी. पहले सभी शांत रहते थे पर अब कुच्छ ना कुकच्छ मज़ाक चलता रहता था. बाबूजी के रंग भी बदल गए थे. वो भी खुश रहते थे. कम्मो की नज़र बाबूजी और उनकी धोती पे रहती थी. वो हमेशा सोचती कि उनकी धोती में छुपा हुआ डंडा कैसा दिखता होगा. उसे लेने में कैसा मज़ा आएगा. मौका ढूँढ के वो उसके अंडरवेर जाँचती और उसे अक्सर उनके अंडरवेर में अलग अलग खुश्बू आती. उसने घर के बाकी लोगों के अंडरवेर भी सूँघे और उसे कन्फ्यूषन होती कि कभी किसी के कछे या कछि में एक टाइप की स्मेल आती तो कभी कैसी.

पर कम्मो कभी रंगे हाथों कुच्छ देख नही पाई. घर में जो भी होता था उसकी पीठ पिछे ही होता था. कभी कभी जब वो दोपहर को घर जाती बच्चों को खाना खिलाने तो वापिस आके उसको किसी ना किसी कमरे की बेड की हालत खराब मिलती. ऐसा लगता था कि बेड पे सेक्स का घमासान हुआ है. पर कौन किसके साथ करके गया ये कभी नही पता चला उसे.

दरवाज़े पे खड़े खड़े जैसे 5 मिनट में पिच्छले 10 - 12 साल की कहानी उसे
की आँखों के सामने घूम गई. एक बार फिर कम्मो ने हाथ बढ़ा के दरवाज़ा भड़भादाया और इंतेज़ार करने लगी.


दोपहर को किचन में काम करते हुए कम्मो परेशान थी. आज घर का महॉल थोड़ा बदला सा था. सब थोड़े चुप थे. सुबह पहली बार आने पे किसी ने दरवाज़ा नही खोला. कम्मो वेट करके थक के बाज़ार चली गई. वापिस 9 बजे लौटी तो घर में सब जागे हुए थे और चाइ पी रहे थे. आज सखी भी इतना नही चहेक रही थी.

शाम का खाना बन चुका था और कम्मो को घर जाना था. कम्मो ने चाइ बनाई और टेबल पे लगा दी. सब वहीं बैठ थे सिवाए बाबूजी और सखी के. राखी ने कम्मो को बाबूजी के कमरे में चाइ देने को कहा. चाइ का प्याला लए कम्मो बाबूजी के कमरे पे दस्तक देने लगी थी कि अचानक उसके कान में आवाज़ पड़ी. दरवाज़ा पूरा बंद नही था और सखी अंदर बाबूजी से बात कर रही थी.

'' बाबूजी आज आपको क्या हो गया है. सुबह से गुम्सुम हैं और आपको देख के बाकी सब भी ऐसे ही हो गए हैं. मुझे अच्छा नही लग रहा. चलिए अपना मूड ठीक कीजिए और सनडे शाम की तैयारी करते हैं. माना कि कल जो भी बातें हुई वो सबके लए समझना थोड़ा डिफिकुल्ट है पर अब जो सच है सो है. और फिर आपने भी दिल की बात कह के कोई ग़लत नही किया. सबको जानने का हक था. कभी ना कभी तो राज़.....'' सखी की बात बीच में अधूरी रह गई, क्योंकि अचानक राखी ने कम्मो को आवाज़ दी और कम्मो को दरवाज़ा खटखटाना पड़ा. कम्मो के कमरे में आते ही बाबूजी ने उसकी तरफ पीठ कर ली और सखी कुर्सी पे बैठे उसे घूर्ने लगी. कम्मो को लगा कि उससे कोई बात च्छुपाई जा रही है. चाइ रख के वो राखी के पास पहुँची और सब काम ख़तम करके अपने घर को चल दी.

पूरे रास्ते कम्मो सखी की बात के बारे में सोचती रही. आख़िर ऐसी कौन सी बात है जो राज़ है. इसी उधेड़बुन में वो घर पहुँची और देखा कि दोनो बच्चे पढ़ाई में लगे है. उसका पति नहाने गया हुआ था. कम्मो ने जल्दी जल्दी खाना बनाया और बच्चों को 7 बजे खाना खिला दिया. इतने में उसका पति तैयार हो के बाहर जाने लगा, कहा कि अपने दोस्त के घर जाना है उसके बेटे की सगाई को तैयारी के लिए. कम्मो घर पे बच्चों के साथ अकेली थी. कम्मो अभी भी बाबूजी और सखी की बात के बारे में सोच रही थी. इसी सोच में वो नहाई और अपने को तैयार किया. बच्चे अपना स्कूल बॅग पॅक करके सोने चले गए. 8 बज चुके थे. कम्मो खाना खाने के लए पति का इंतेज़ार कर रही थी कि तभी पति के दोस्त का लड़का रमेश आ गया. रमेश की सगाई एक हफ्ते बाद होने वाली थी. उमर करीब 23 साल थी. देखने में ठीक था पर दिमागी तौर पे भोला था. पड़ाई ज़ियादा नही की और बचपन से बाप के साथ खेत में काम करता था. अपनी खेती से उनका घर चलता था.

रमेश ने कम्मो से कहा कि चाचा आज रात नही आएँगे क्योंकि पिताजी के साथ बहुत सारी बात करनी है तो आप खाना खा लेना. कम्मो ने उसे वहीं बैठा लिया. रमेश को बड़े होते हुए देखा था उसने. उसके लिए वो एक बच्चे जैसा ही था. पर अब जब उसकी शादी होने लगी थी तो कम्मो उसे थोड़े अलग ढंग से देखने लगी. क्या ये लड़का शादी के लिए तैयार है ? इतना भोला है ये कि इसे तो लड़कियो के बारे में पता भी नही होगा. ये शादी के फ़र्ज़ कैसे निभाएगा ? सोचते सोचते कम्मो उसके बदन को गौर से घूर्ने लगी. कुर्ते पाजामे में बैठा रमेश उसे अचानक से कामदेव लगने लगा. चेहरे पे हल्की दाढ़ी और उसकी बड़ी बड़ी आँखें उसके चेहरे को आकर्षित बना रही थी.
क्रमशः............................................

rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:39



''Jab hum log iske ghar pehli baar pahunche to maine jaan bhooj ke 2 din ki sheve nahi ki aur dhoti kurta aur pagdi pehen ke aur kaala chashma laga ke gaya. Mujhe umeed thi ki ye mujhe pehchaanegi nahi. Uske baad in dono ka rishta pakka ho gaya. Par sagai ke baad isne Sujit se kaha ki ye mujhe apna kamra dikhana chahti hai ki ye kaisi dresses pehnati hai aur mujhe aage ke lie koi aitraaz naa ho. Iske Ma Babuji ko kuchch ajeeb laga par woh kuchch bole nahi aur isne mujhe apne kamre men le jaake meri dhoti men hath daal dia. Main ek dum ghabra gaya aur sath hi achambhit bhi reh gaya. Dekhte hi dekhte isne mera lund viryhi men bhar ke bahar nikala aur use sehlaate hue choosne lagi. Ye us din bhi itni kaamuk lag rahi thi ki main ise rok nahi paya aur khade khade upar se iske mummon ki gehraaion ko naapte hue iske munh men jhar gaya.''

'' Isne muskurate hue meri taraf dekha aur apna munh achhe se saaf kia aur bacha hua viry bhi chaat lia. Phir khade hoke isne apne uroj blouse men se nikaale aur mere munh ki taraf karke boli....'Babuji us din aapne na to inhe chhua tha aur na hi dhang se dekha tha...par aaj ye aapke sparsh aur aapki jeebh ka intezaar kar rahe hain. Aaraam se choosie aur bataiye ki aapki doosri bahu ka swaad kaisa hai.' Ye keh ke ye hans di aur muskuraate hue mere khule munh ko choom lia. Sath hi sath isne mere hathon ko pakar ke apne mummon ko sehelwaya aur phir mere munh ko apni chhation ke beech daba dia. Jab main iski khushboo le rha tha to ye boli ki us din aapko pata chal gaya tha ki meri choochion se meri choot ka kya rishta hai aur sach men agar Sujit unhe nahi chhota to shayad aapki ye judi hui unglian bhi kamaal nahi kar paati.''

''Iska ye kehna tha aur main samjh gaya ki isne aaj mujhe kaise pehchana. Maine bhi khushi se paagal hoke 2 min tak iski choochion ka bhoob sewan kia. Tab mujhe laga ki koi aa jaega so maine iska blouse waapis set kia aur muskurate hue ise ek chumban dia. Phir maine isko sabke beech aashirwaad dia aur apni nai family men muskuraate hue welcome kia....''' Babuji apne tanne hue lode ko sehlaate hue bole.

Minni ka munh khula ka khula hi tha aur akhi thora sharmaai hui niche dekh rahi thi. Sujit jise ki doosre kisse ka pata nahi tha woh bhi kabhi Rakhi ko to kabhi Babuji ko dekh raha tha. Achanak se Minni ke munh se ek siskaari nikli. Sakhi ne uske nipple ko unglion ke beech umeth dia tha aur usko gaal pe ek kiss di.

'' Babuji aap aur Rakhi...matlab aapne Rakhi ko shaadi se pehle hi chod dia tha..Babuji ..aap to ...sach men..main kya bolun...aap naa....'' Minni thora gusse thora excitement men boli. Saari kahani sun ke uski choot paniya gai thi. Raju ka 10 inch uske chootron pe fanfana raha tha.

'' Haan haan bol de ki main bahut bada tharki hoon...par beti ek baat yaad rakhna ki mere pass Rakhi ko ghar men laane ke lie ye test karna zaroori tha aur sabse badi baat ye ki meri choice galat nahi nikli..aaj jab tu choot chuswaati hai to thanks to mujhe hi karti hai ki maine tujhe aisi devrani laa ke di. ''' Babuji lund sehlaaye jaa rahe the.

Itne men Sakhi uthi aur unse jaake lipat gai. Dekhte hi dekhte usne Babuji se apni jeebh lada di aur unke lode pe apni choot ka mukhya dwaar sataa dia. Dwaar khula aur ghoda andar ho gaya. Thori der shaanti rahi aur phir choot men machi kulbulahat ne apna rang dikha dia aur dekhte hi dekhte ek haseen saanwli si choot ek adhed umr ke lode pe uchhlane lagi. Rakhi ne aage jhuk ke Sujit ka lund pichhe se lia aur Sanjay apni minni bhabhi ki choot men gote khaane laga. Raju apna 10 inch ka loda kabhi Minni ko khilata to kabhi Rakhi ke mukh chodan ka maza leta....aur is tarike se Babuji ke pariwaar ka ek aur samunhik chodan shuru ho gaya.

'' Bibiji ..ooo Bibi jiiii darwaza kholie bibi ji...'' Kamla urf Kammo darwaza bhadbhada rahi thi. '' Subah ke 8 baj gae hai aur bibi ji abhi tak so rahi hain ..aisa to hota nahi hai..'' Kammo apni soch men doobi darwaze pe intezaar kar rahi thi.

Kammo ki umar 36 saal thi. Kad 5 ft 3 inch. Badan gatheela tha. 2 bachhon ki maa to kahin se bhi nahi lagti thi. Mehnat karna uski bachpan ki aadat thi. Dimaag se thori kamzor thi par duniyadaari aur logon ki samjh thi use. 19 saal ki umar men jab uska byah hua to use pata nahi tha ki aane waale din kitne kathin honge. Pati ek factory men mazdoor tha. Salary theek thi. Ghar men saas aur ek bada Jeth tha jo ki shaadi nahi karna chahta tha. Woh bhi factory men kaam karta tha par salary chote bhai se kam thi. Usko bas factory ka kaam aur ghar waapis aake puja karne ka shauk tha. Waise dikhne men theek tha.

4 saal men Kammo ke 2 bachhe hue. Dono ladke. Saas bahut khush thi potte paa ke. Kammo ghar ke kaam kaaj men lagi rehti. Ek din achanak jaise sukhi pariwaar pe bijli giri. Pati ka factory men accident ho gaya aur uska ek hath kaam karna band ho gaya. Kuchh din ke baad usko factory se nikaal dia gaya. Ab woh din bhar ghar pe rehta aur bachhon ko dekhta aur Kammo ne doosron ke gharon men jaake kaam karna shuru kar dia. Saas apne bete ki haalat dekh ke bimaar rehne lagi aur 1 saal men unka dehant ho gaya. Ab kammo ki jimmewaarian aur bhi bad gai. Isi beech uske Jeth ko factory se 10 km door godown men shift kar dia gaya. Kuchh din to woh roz aata jaata tha par phir bus ke kiraye ka bhoj takleef dene laga. Kammo ke kehne pe usne godown men hi rehna shuru kar dia aur hafte - 15 din men ghar aane jaane laga.

Kammo jaise taise 3 - 4 gharon men kaam karke pariwaar paal rahi thi. Unme se ek ghar men sirf 3 auraten aur ek 55 - 60 saal ke buzurg rehte the. Darasal woh ghar sheher ke ek achhe vyapaari ka tha jo ki videsh men kaam chalata tha. Saal men 2 baar ghar aata tha. Ghar ki auraton men uski biwi, uski badi widhwa behen aur uski chhoti saali thi. Biwi akeli hone ki wajah se apni behen ko sath le aai thi. Kuchh samay baad jab uski badi behen widhwa ho gai to woh bhi wahin ghar pe aake rehne lagi. Ye pariwaar kaafi sampann tha par ghar men ek jawaan mard ki kami thi. Jab bhi woh vyapaari ghar aata to jaise ghar swarg ban jaata. Ek roz jab Kammo unke ghar kaam kar rahi thi to usne dekha ki maalik ki behen chhup chhup ke khidki se kuchh dekh rahi hai. Kammo ne doosri aur se jaake kamre men jhanka to woh vyapaari apni biwi ke sath chudaai men mashgool tha.

Kammo samjh gai ki widhwa behen apne bhai aur bhabhi ka vasna bhara khel dekh ke uttejit ho gai hai. Waise yahi haal Kammo ka bhi tha. Uska pati ghar pe rehne ki wajah se sust ho gaya tha aur apni bimaari ke chalte Kammo se achha sex nahi kar pata tha. Kammo ki aankhon ke saamne jo drishya tha usne uske badan ki aag ko achhe se bhadka dia tha. Naa jaane kaise aur kab Kammo ne maalik ki badi behen ke paas jaake uske khule chooche pakar lie aur dono auraten lund choot ka khel dekhte dekhte kab choot choot ka khel khelne lagi. Ye baat aaj bhi Kammo ko achambhit kar deti hai. Par us din ke baad Kammo ne kabhi bhi choot chhot khelne ka mauka nahi chhora. Unhi dino uski mulakaat Hariya kaka se hui jo ki Babuji ka naukar tha. Hariya kaka use sabzi mandi men milaa karte the. 3 - 4 mulakaat ke baad Hariya kaka use Babuji ke yahan le aae aur use part time naukri dilwa di. Kuchh hi dino men Kammo ko sirf choot choot khel ke boriyat hone lagi. Usne apne dil ki baat maalik ki widhwa behen se kahi. Ab dono ka mann lund khaane ko hone laga. Par karen to kaise. Ye uljhan bhi sulajh gai jab us vyapaari ki biwi aur saali kuchh din ke lie apne gaon gae. Mauke ka fayada uthaate hue Kammo ne Hariya ko apne jaal men fansaya aur uneh seduce kia.

Hariya jo ki un dino ghar men aai nai nai Minni ko dekh ke machalta tha, bina mauka ganwae dono bhookhi shernion ke baade men ghus gaya. Kammo aur uske maalik ki chuddkkar widhwa behen ki roz apne tagde lund se sewa karta. Kabhi kabhi ek sath to kabhi alag alag. Par ye mauka sirf adhe ghante ke lie hi mil paata tha. Shaam ko sabzi ke bahane se jaata aur Kammo use wahan se apne maalik ke ghar ke pichhe bane kamre men le jaati. Wahan Hariya uska aur uski widhwa maalkin ka joban lootta. Khaas taur se use us tharki widhwa ki chudaai men maza aata ki kis tarah se ek shareef ghar ki chudaas aurat uske mote tagde lund ko munh men rakh ke poojti thi. Kammo se to woh Babuji ke ghar men bhi chher chhar kar leta tha. Par Kammo ko ek cheez ki kami mehsoos hoti thi... Hariya ke aane se uska choot choot ka khel kam ho gaya tha. Par ab use choot chaatne ki aadat pad chuki thi. Uski widhwa maalkin jab Hariya ke lode pe chadti to Kammo khoob chatai karti par usko kuchh khaali pan sa lagta tha. Shayad ki jis choot men Hariya ka loda tha woh uspe apna hak samjhati thi.

rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:39



Jab vyapaari ki biwi aur Saali waapis aae to Hariya ke lie mauke kam ho gae. Par Hariya ko tab tak Minni ki choot ka swad lag chuka tha. Haan Minni ki choot use kam hi milti thi par phir bhi woh kaam chala raha tha. Kammo bhi waapis choot choot ke khel se khush thi. Par tabhi us vyapaari ki widhwa behen ke lie ek achha rishta aaya aur jaldi jaldi men uski shaadi ho gai. Kammo ek baar phir akeli pad gai. par jaisa ki kehte hain ki jahan chaah wahan raah. Behen ki shaadi ke kuchh din baad jab vyapaari apni biwi ki sikaai kar raha tha to Kammo ne uski saali ko apne joban se khelte hue dekha. Kammo ki to jaise lottery nikal padi aur use apne puraane din yaad aa gae. Kammo ne jaldi hi us saali ke sath bhi samlaingik sambandh bana lie. Saali chooki lund ke khel se bilkul anjaan thi so uska choot choot ke khel men man ziada achhe se laga. Kammo ko jaise swarg mil gaya. Jawaan ladki uski chochion ko choosti to Kammo ki choot ke dhaare ruke nahi rukte the. Ek baar uski premika ne usse apni chudaai ki baat kahi. Josh men aake Kammo ne Hariya ko nimantran de daala. Hariay bhi kahan mauka chhorta. Usne bhi sath dia aur Saali ki kunwaari choot pe apne lund ki mohar laga di. Saali ko to jaise jannat mil gai. Lund ka swaad choot ko lagte hi woh paagal ho gai. Hariya se 2 baar aur chudne ke baad usne apne college ke doston se sambandh banane shuru kar die. Kammo ke sath ab woh kat kat ke rehne lagi. kammo bhi iss baat ko kab tak sambhaalti so usne ek din Saali ke sath jabardasti ki. Shayad ye sochna mushkil hai par us din kammo ne saali ka rape kia. Haalanki ant samay tak saali bhi uske munh men jhari par usko ek naukraani ke hathon apna rape beizzati laga aur usne kuchh dino men Kammo ko kaam se nikalwa dia.

Idhar Babuji ke ghar men kaam karte hue Kammo ko 3 saal ho gae the. Rakhi bhi ghar men bahu ban ke aa chuki thi. Hariya ka dehaant ho chuka tha. Ab Kammo ke lie lund choot aur choot choot ke khel kam ho gae the. Bachhon ki jimmewarian aur pati ki sewa karte karte woh thak jaati thi. Isi dauraan Babuji ke yahan se use permanent naukri ka nyota mila. Subah 8 baje se leke shaam 4 baje tak use ghar ke kaam dekhne the. Salary bhi achhi thi so usne baaki sab ghar chhor ke Babuji ke yahan hi naukri kar li. Uske saamne saamne ghar men teesri bahu bhi aai. Sex ke maamle men use Hariya kaka ka lund bahut yaad aata tha. Par majboori men woh sirf apne pati aur uske ek dost ke sath hi guzara kar rahi thi. Pati ka dost kabhi kabhi sheher se ata to usko 2 -3 ghante jam ke chodta. Baaki samay ya to woh apni munia sehla leti ya pati se sex kar leti.

Jab se Kammo ne Babuji ke yahan kaam shuru kia tha use paise ki kami nahi hui. Kaam woh achhe se karti thi, hath men safai bhi thi aur dekhte dekhte uske kapde aur rang dhang badalne lage. Ab woh poore roop se naukrani nahi lagti thi. Kisi madhyam warg ki mahila lagne lagi thi. Sakhi ke ghar men aane ke baad se ghar ka mahaul kaafi badal gaya tha. Ab ghar men hamesha chihunk rehti thi. Pehle sabhi shaant rehte the par ab kuchh na kucchh mazak chalta rehta tha. Babuji ke rang bhi badal gae the. Woh bhi khush rehte the. Kammo ki nazar Babuji aur unki dhoti pe rehti thi. Woh hamesha sochti ki unki dhoti men chhupa hua danda kaisa dikhta hoga. Use lene men kaisa maza aaega. Mauka dhoondh ke woh uske underwear jaanchti aur use aksar unke underwear men alag alag khushboo aati. Usne ghar ke baaki logon ke underwear bhi soonghe aur use confusion hoti ki kabhi kisi ke kachhe ya kachhi men ek type ki smell aati to kabhi kaisi.

Par Kammo kabhi range hathon kuchh dekh nahi paai. Ghar men jo bhi hota tha uski peeth pichhe hi hota tha. Kabhi kabhi jab woh dopahar ko ghar jaati bachhon ko khana khilaane to waapis aake usko kisi na kisi kamre ki bed ki haalat kharab milti. Aisa lagta tha ki bed pe sex ka ghamaasaan hua hai. Par kaun kiske sath karke gaya ye kabhi nahi pata chala use.

Darwaaze pe khade khade jaise 5 min men pichhle 10 - 12 saal ki kahani use
ki aankhon ke saamne ghoom gai. Ek baar phir Kammo ne hath bada ke darwaza bhadbhadya aur intezaar karne lagi.


Dopahar ko kitchen men kaam karte hue Kammo pareshaan thi. Aaj ghar ka mhaul thora badla sa tha. Sab thore chup the. Subah pehli baar aane pe kisi ne darwaza nahi khola. Kammo wait karke thak ke bazaaar chali gai. Waapis 9 baje lauti to ghar men sab jage hue the aur chai pi rahe the. Aaj Sakhi bhi itna nahi chehek rahi thi.

Shaam ka khana ban chuka tha aur Kammo ko ghar jaana tha. Kammo ne chai banai aur table pe laga di. Sab wahin baith the siwae Babuji aur Sakhi ke. Rakhi ne Kammo ko Babuji ke kamre men chai dene ko kaha. Chai ka pyala lie Kammo Babuji ke kamre pe dastak dene lagi thi ki achanak uske kaan men awaaz padi. Darwaza poora band nahi tha aur Sakhi andar Babuji se baat kar rahi thi.

'' Babuji aaj aapko kya ho gaya hai. Subah se gumsum hain aur aapko dekh ke baaki sab bhi aise hi ho gae hain. Mujhe achha nahi lag raha. Chalie apna mood theek kijie aur Sunday shaam ki taiyaari karte hain. Maana ki kal jo bhi baaten hui woh sabke lie samjhna thora difiicult hai par ab jo sach hai so hai. Aur phir aapne bhi dil ki baat keh ke koi galat nahi kia. Sabko jaanne ka hak tha. Kabhi na kabhi to raaz.....'' Sakhi ki baat beech men adhuri reh gai, kyonki achanak Rakhi ne Kammo ko awaz di aur Kammo ko darwaza khatkhatana pada. Kammo ke kamre men aate hi Babuji ne uski taraf peeth kar li aur Sakhi kursi pe baithe use ghoorne lagi. Kammo ko laga ki usse koi baat chhupai ja rahi hai. Chai rakh ke wo Rakhi ke pass pahunchi aur sab kaam khatam karke apne ghar ko chal di.

Poore raaste Kammo Sakhi ki baat ke baare men sochti rahi. Akhir aisi kaun si baat hai jo raaz hai. Issi udhedbun men woh ghar pahunchi aur dekh ki dono bachhe padai men lage hai. Uska pati nahane gaya hua tha. Kammo ne jaldi jaldi khana banaya aur bachhon ko 7 baje khana khila dia. Itne men uska pati taiyaar ho ke bahar jaane laga, kaha ki apne dost ke ghar jana hai uske bete ki sagai ko taiyaari ke lie. Kammo ghar pe bachhon ke sath akeli thi. Kammo abhi bhi Babuji aur Sakhi ki baat ke baare men soch rahi thi. Issi soch men woh nahai aur apne ko taiyaar kia. Bachhe apna school bag pack karke sone chale gae. 8 baj chuke the. Kammo khana khane ke lie pati ka intezaar kar rhi thi ki tabhi pati ke dost ka ladka Ramesh aa gaya. Ramesh ki sagai ek hafte baad hone wali thi. Umar kareeb 23 saal thi. Dekhne men theek tha par dimaagi taur pe bhola tha. Padai ziada nahi ki aur bachpan se baap ke sath khet men kaam karta tha. Apni kheti se unka ghar chalta tha.

Ramesh ne Kammo se kaha ki Chacha aaj raat nahi aaenge kyonki pitaji ke sath bahut saari baat karni hai to aap khana kha lena. Kammo ne usse wahin baitha lia. Ramesh ko bade hote hue dekha tha usne. Uske lie woh ek bachhe jaisa hi tha. par ab jab uski shaadi hone lagi thi to Kammo use thore alag dhang se dekhne lagi. Kya ye ladka shaadi ke lie taiyaar hai ? itna bhola hai ye ki ise to ladkion ke baare men pata bhi nahi hoga. Ye shaadi ke farz kaise nibhaega ? Sochte sochte Kammo uske badan ko gaur se ghoorne lagi. Kurte pajame men baitha Ramesh use achanak se kaamdev lagne laga. Chehre pe halki daadi aur uski badi badi aankhen uske chehre ko aakarshit bana rahi thi.