हिन्दी सेक्सी कहानियाँ

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raj..
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Re: हिन्दी सेक्सी कहानियाँ

Unread post by raj.. » 31 Oct 2014 08:04

मैं इतनी सेक्सी हूँ कि मेरा गोरा बदन, मेरी सेक्सी कमर, लम्बे रेशमी बाल, कसे हुए चूतड़ और मोटे मम्मों को देख कर लड़के तो क्या बुड्ढों का भी दिल बेईमान हो जाये।

अब मैं आपको अपनी बात बताती हूँ।यह बात तब की है जब मेरे पति विदेश में प्रोजेक्ट के सिलसिले में पोस्टेड थे एक साल के लिए -6 महीने हो गए थे-वैसे भी आप लोग तो जानते ही है के मेरे पति तो मुझे ठीक से चोद ही नहीं पाते -देवर जी बंगलोरे में सर्विस करते थे वो तीन तीन महीने में आते थे -ये तब कि बात है जब मेरी सासु कलकता की एक अस्पताल में दाखिल थी और मेरे ससुर जी भी रात को उनके पास ही रहते थे, मैं सुबह घर से खाना वगैरा लेकर जाती थी। एक दिन मैं सुबह जब बस में चढ़ी तो बस में बहुत भीड़ थी, जिनमें ज्यादा कॉलेज के लड़के थे।

जहाँ पर मैं खड़ी थी वहां पर मेरे आगे एक बूढ़ी औरत और मेरे पीछे एक लड़का था। कुछ देर बाद उस लड़के ने अपना लण्ड मेरी गाण्ड से लगा लिया, बस में इतनी भीड़ थी कि ऐसा होना आम था और किसी को पता भी नहीं चल सकता था। यह तो मुझे और उस लड़के को ही पता था।

मेरी तरफ से कोई विरोध ना देख कर लड़के ने अपना लण्ड मेरी गाण्ड पर रगड़ा, मेरे बदन में एक करंट सा दौड़ गया, मुझे लण्ड के स्पर्श से बहुत मजा आया !

और आता भी क्यों ना? लण्ड होता ही मजे के लिए है.. खासकर मेरे लिए... लड़के का लण्ड सख्त हो चुका था और बेकाबू भी होता जा रहा था क्योंकि अब उसकी छलांगे मेरी गाण्ड महसूस कर रही थी.. जब भी बस में कहीं धक्का लगता तो मैं भी उसके लण्ड पर दबाव डाल देती..

हम दोनों लण्ड और गाण्ड की रगड़ाई के मजे ले रहे थे.. अब बस पहुँच चुकी थी और सब बस से उतर रहे थे, मुझे भी उतरना था और उस लड़के को भी।

बस से उतरते ही लड़का पता नहीं कहाँ चला गया, मेरा चुदने का मन कर रहा था, मगर वो लड़का तो अब कॉलेज चला गया होगा, यह सोच कर मैं उदास हो गई।

अब मुझे अस्पताल जाना था, मैं बस स्टैंड से बाहर आ गई और ऑटो में बैठने ही वाली थी कि वही लड़का बाईक लेकर मेरे पास आकर खड़ा हो गया..

मैं उसे देख कर हैरान हो गई, वो बोला- भाभी जी आओ, मैं आपको छोड़ देता हूँ।

पहले तो मैंने मना कर दिया, मगर फिर उसने कहा- आप जहाँ कहोगी मैं वहीं छोड़ दूंगा..

तो मैं उसके साथ बैठ गई।

वैसे भी लड़का इतना सेक्सी था कि उसको मना करना मुश्किल था। रास्ते में उसने अपना नाम अनिल बताया। मैंने भी अपने बारे में बताया। थोड़ी आगे जाकर उसने कहा- भाभी अगर आप गुस्सा ना करो तो यही पास में से मैंने अपने दोस्त से कुछ किताबें लेनी थी..

मैंने कहा- कोई बात नहीं, ले लो..

फिर आगे जाकर उसने एक बड़े से शानदार घर के आगे बाईक रोकी, गेट खुला था तो वो बाईक और मुझे भी अन्दर ले गया।

उसका दोस्त सामने ही खड़ा था.. वो दोनों मुझे थोड़ी दूर खड़े होकर कुछ बातें करने लगे। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे चोदने की बातें कर रहे हों..

काश यह दोनों लड़के आज मेरी चुदाई कर दें !

फिर अनिल ने अपने दोस्त से मिलवाया, उसका नाम सुनील था, सुनील ने मुझे अन्दर आने को कहा मगर मैंने सोचा कि सुनील के घर वाले क्या सोचेंगे।

इसलिए मैंने कहा- नहीं मैं ठीक हूँ !

और अनिल को जल्दी चलने को कहा..

तो अनिल ने कहा- भाभी जी, दो मिनट बैठते हैं, सुनील घर में अकेला ही है।

यह सुनकर तो मैं बहुत खुश हो गई कि यहाँ पर तो बड़े आराम से चुदाई करवाई जा सकती है..

मैं अन्दर चली गई और सोफे पर बैठ गई। सुनील कोल्ड ड्रिंक लेकर आया, हम कोल्ड ड्रिंक पीते हुए आपस में बातें कर रहे थे।

अनिल मेरा साथ बैठा था और सुनील मेरे सामने। वो दोनों घुमा फिरा कर बात मेरी सुन्दरता की करते।

अनिल ने कहा- भाभी, आप बहुत सुन्दर हो, जब आप बस में आई थी तो मैं आपको देखता ही रह गया था..

मैंने कहा- अच्छा तो इसी लिए मेरे पास आकर खड़े हो गये थे?

अनिल- नहीं भाभी, वो तो बस में काफी भीड़ थी, इस लिए...

फिर मुझे वही पल याद आ गये जो बस में गुजरे थे इसलिए मैं शरमाते हुए चुप रही।

फिर अनिल बोला- भाभी वैसे बस में काफी मजा था... मेरा मतलब इतनी भीड़ थी कि सर्दी का पता ही नहीं चल रहा था..

मैंने शरमाते हुए कहा- हाँ...! वो... वो... तो है..

मैं समझ गई थी कि वो क्या कहना चाहता है।

उसने अपना हाथ बढ़ाया और मेरे हाथ पर रख दिया और बोला- भाभी अब काफी सर्दी लग रही है, अब क्या करूँ?

उसका हाथ पड़ते ही मैं शरमा गई और बोली- क क.. क्या... क्या.. कर.... करना.. है... चाय पीओ गर्म गर्म...

अनिल- भाभी, मगर मुझे तो वोही गर्मी चाहिए जो बस में थी...

मैं शरमाते हुए अपने बाल ठीक करने लगी..

मेरा शरमाना उनको सब कुछ करने की इजाजत दे रहा था।

अनिल ने मौके को समझा और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए...

मैंने आँखे बंद कर ली और सोफे पर ही लेट गई..

अनिल भी मेरे ऊपर ही लेट गया..

अब सारी शर्म-हया ख़त्म हो चुकी थी..

अनिल ने मेरे होंठ अपने मुँह में और मेरे चूचे अपने हाथों में पकड़ लिए थे..

मेरी आँखें बंद थी, इस वकत सुनील पता नहीं क्या कर रहा था मगर उसने अभी तक मुझे नहीं छुआ था..

अनिल मेरे होंठों को जोर जोर से चूस रहा था, मैंने हाथ उसकी कमर पर ढीले से छोड़ रखे थे..

फिर सुनील मेरी सर की तरफ आ गया और मेरी गोरी गोरी गालों और मेरे बालों में हाथ घुमाने लगा..

मेरी आँखें अब भी बंद थी...

वो दोनों मुझसे प्यार का भरपूर का मजा ले रहे थे...

कभी अनिल मेरे होंठ चूसता तो कभी सुनील..

अनिल ने मेरी पजामी और कमीज उतार दी..फिर सुनील ने ब्रा और पेंटी भी उतार दी..

मैं बिलकुल नंगी हो चुकी थी..

फिर मैं सोफे पर घुटनों के बल बैठ गई और सुनील की पैंट उतार दी.. उसका लौड़ा उसके कच्छे में फ़ूला हुआ था..

मैंने झट से उसका लौड़ा निकाला और अपने हाथों में ले लिया और फिर मुँह में डाल कर जोर जोर से चूसने लगी। मैं सोफे पर ही घोड़ी बन कर उसका लौड़ा चूस रही थी और अनिल मेरे पीछे आकर मेरी चूत चाटने लगा..

अनिल जब भी अपनी जीभ मेरी चूत में घुसता तो मैं मचल उठती और आगे होने से सुनील का लौड़ा मेरे गले तक उतर जाता..

सुनील भी मेरे बालों को पकड़ कर अपना लौड़ा मेरे मुंह में ठूंस रहा था..

फिर सुनील का वीर्य निकल गया और मैंने सारा वीर्य चाट लिया.. उधर अनिल के चाटने से मैं भी झड़ चुकी थी।

अब अनिल का लौड़ा मुझे शांत करना था।अनिल सोफे पर बैठ गया और अनिल के आगे उसी की तरफ मुंह करके उसके लौड़े पर अपनी चूत टिका कर बैठ गई। उसका लोहे जैसा लौड़ा मेरी चूत में घुस गया..अह्ह्ह. मुझे दर्द हुआ मगर मैंने फिर भी उसका पूरा लौड़ा अपनी चूत में घुसा लिया।

मैं ऊपर-नीचे होकर उसके लौड़े से चुदाई करवा रही थी, सुनील मेरे मम्मों को अपने हाथों से मसल रहा था।

अनिल भी नीचे से जोर जोर से मेरी चूत में अपना लौड़ा घुसेड़ रहा था। इसी दौरान मैं फ़िर झड़ गई और अनिल के ऊपर से उठ गई मगर अनिल अभी नहीं झड़ा था तो उसने मुझे घोड़ी बना लिया और अपना लौड़ा मेरी गाण्ड में ठूंस दिया..

उफ़ यह बहुत मजेदार चुदाई थी..

फिर सुनील मेरे सामने आ गया और उसने मुझे अनिल के लौड़े पर बिठा दिया। अब अनिल मेरे नीचे था और मैं अनिल का लौड़ा अपनी गाण्ड में लिए उसके पैरों की ओर मुंह कर के बैठी थी..

सुनील मेरे सामने आ कर बैठ गया और अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसाने लगा, मैं अनिल पर उलटी लेट गई और सुनील ने मेरे ऊपर आकर अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया..

उफ़ अब तो मुझे बहुत दर्द हो रहा था, मेरा दिल चिल्लाने को कर रहा था मगर थोड़ी ही देर में चुदाई फिर शुरू हो गई। मैं दोनों के बीच चूत और गाण्ड की प्यास एक साथ बुझा रही थी और वो दोनों जोर जोर से मेरी चुदाई कर रहे थे।

मैं दो बार झड़ चुकी थी.. फिर अनिल भी झड़ गया और उसके बाद सुनील भी झड़ गया।

हम तीनों थक हार कर लेट गये..

फिर मैंने अपने कपड़े पहने और हस्पताल चली गई,

रात को मैं अकेली ही घर होती थी इस लिए वो अनिल और सुनील दोनों रात को मुझे हस्पताल से घर ले जाते और सारी रात मेरी चुदाई करते, सुबह होते ही वो दोनों लोगों के जागने से पहले निकल जाते और मैं बाद में हस्पताल आ जाती..

इसी तरह पाँच दिन चुदाई चलती रही और फिर सासु ठीक होकर घर आ गई तो चुदाई बंद हो गई।

rajaarkey
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Re: हिन्दी सेक्सी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 02 Nov 2014 10:21

शेरू की मामी
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मेरा नाम शेरू है. मैं बीस साल का एक जवान लड़का हूं. मैं अपने मामाजी के यहां रहता हूं. पिछले तीन महने से मैं अपनी मामी कमल और उसकी सहेली रीना के साथ सम्भोग कर रहा हूं. दोनों ३५ साल की चुदैल औरतें हैं और मेरे ९ इंच के लंड पर फ़िदा हैं. जब भी मौका मिलता है, दोनों मुझसे मरवाने आ जातीं हैं.

एक दिन मुझे रीना की गांड मारते हुए देख कर मेरी मामी ने बड़े आश्चर्य से पूछा कि मेरा इतना बड़ा लंड वह कैसे अपनी संकरी गांड में लेती है. मेरी मामी ने मेरा ९ इंच का लवड़ा रीना की गांड में जाते हुए देखा. रीना बोली कि दर्द तो होता है पर मस्त मोटे लंड से गांड मराने में मजा भी बहुत आता है. कमल मामी ने भी कई बार गांड मराई थी पर छोटे लंडों से. मेरे मामा भी हमेशा उसकी गांड मारते थे पर अपने ५ इंच के बचकाने लंड से.

रीना बोली "कमल तू घबरा मत देख कितनी आसानी से शेरु का हलब्बी लंड मेरी गांड में जा रहा है. सिर्फ़ थूक लगा कर डाला है इसने. तू तो पहले भी गांड मरवा चुकी है फ़िर क्यों डरती है?"

कमल ने जवाब दिया "हाय तू इतना मोटा लंड कैसे खा रही है अपनी कसी गांड में, मेरी तो देख कर ही फटी जा रही है".

दोनों सहेलियां बातें कर रही थीं और मैं रीना की गांड में अपना ९ इंच का लंड जोर जोर से पेल रहा था. पूरा लंड पिस्टन की तरह उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था. रीना सिसक सिसक कर कह रही थी "ऒह, आह, मर गयी, गांड फट गयी मेरी, धीरे धीरे डालो राजा".

मेरी मामी हमारे पास बैठ कर अपनी सहेली की टाइट गांड की चुदाई देख रही थी. एक बार वह मुझसे चुद चुकी थी. पर रीना को गांड मराते देख कर वह फिर से गरम होने लगी और झांटें शेव की हुई अपनी चिकनी चूत से खेलने लगी. वह बुरी तरह से अपनी बुर में उंगली अन्दर बाहर करते हुए मुठ्ठ मारने लगी. मैं उसके पपीते जैसे बड़े बड़े स्तनों से खेल रहा था.

मैं बोला "मामी जब तुम गांड चुदवा चुकी हो तब क्यों डर रही हो, रीना भी पहले डरती थी लेकिन अब देखो कितने प्यार से चुदवा रही है. आज तुम मुझे भी अपनी मस्त गांड का मजा दे दो, बहुत प्यार से डालूंगा लौड़ा, तेल या क्रीम लगा कर चोदूंगा, आराम से चला जायेगा, तुम्हारी गांड तो मामाजी का लंड खा ही चुकी है, थोड़ा सा ही मेरा और मोटा और लंबा है".

कमल घबराई "ना बाबा ना, तुम्हारा गधे जैसा लंड मेरी नाज़ुक गांड फाड़ डालेगा, मेरी तो चूत ही फट कर रह जाती है, गांड के तो चिथड़े उड़ जायेंगे, माफ़ करो मुझे, रीना से ही मजा ले लो खूब."

रीना जो अपनी गांड की मांसपेशियों को सिकोड़ सिकोड़ कर मेरे लंड को मजा ले ले कर दुह रही थी, बोली "शेरू, तुम आज कमल की गांड जरूर मारना, बहुत बनती है साली, अपना पूरा लौड़ा डाल के इसकी फाड़ देना, अगर ना गांड चुदवाये तो आज इसकी चूत भी मत चोदना, तुम्हे मेरी कसम".

मैने रीना की गांड में से लंड निकाला और मामी को बोला "देख कमल रानी, कितनी आसानी से रीना की गांड में मैं अपना पूरा लंड पेलता हूं".

मैंने रीना के दोनों मस्त चूतड़ पकड़ कर उन्हें अलग अलग किया और उसका गुलाबी छेद मामी को दिखाया. कमल मामी उसे देख कर मस्ती में अपनी बुर रगड़ने लगी. फ़िर मैंने अपना बुरी तरह सूजा हुआ सुपाड़ा गांड के छेद पर रखा. रीना सांस रोक कर मेरे धक्के का इन्तजार कर रही थी.

एक धक्के में मैंने आधा लंड रीना की कसी हुई गांड में उतार दिया और फ़िर दूसरे जोरदार धक्के से मेरा पूरा फ़नफ़नाया लंड उसके चूतड़ों के बीच गड़ गया. मेरा वृक्क उसके चूतड़ों को छू रहा था. रीना सिर्फ़ प्यार से हुमक कर बोली "हाय, धीरे से, राजा".

मैं मामी से बोला "देखा तुमने, कितनी आसानी से पूरा लंड चला गया रीना की गांड मैं"

मामी चकरा गई "सचमुच, ताज्जुब है, लगता है, रीना तू शेरू से पहले भी गांड मरवा चुकी है, तभी तो तेरी गांड में आसानी से इसका लंड चला गया, बोल मैं ठीक कह रही हूं कि नहीं"

rajaarkey
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Re: हिन्दी सेक्सी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 02 Nov 2014 10:21

रीना मान गई "अब तुझसे क्या छुपाना, मैं तो शेरु से १० - १२ बार गांड चुदवा चुकी हूं अपने घर में, पहली २ - ३ बार तो जरूर दर्द हुआ था लेकिन अब तो मजा आता है, तू भी आज चुदवा ले, शेरु का दिल रख ले मेरी जान."

"अच्छा तू मुझ से छुप कर चुदती रही मेरे भांजे से और शेरु, तुमने भी मुझसे छुपाया, बहुत हरामी हो साले गांडू, क्या तुझे रीना की चूत और गांड ज़्यादा पसन्द है, बोलो?" कमल मामी चिढ़ कर बोली.

मैंने उसे समझाते हुए उसका चुम्मा लिया और कहा "नहीं मेरी कमल मामी डार्लिंग, आप तो मेरा पहला प्यार हो, आप की ही वजह से मुझे रीना की चुदाई का मौका मिला, जो बात तुम्हारी चूत में है वोह किसी में नहीं, लेकिन क्यों कि रीना की भी मैं बार बार चोद रहा हूं इस लिये इसकी भी चूत और गांड से मुझे प्यार है".

रीना नाराज़ होकर अपनी गांड में से मेरा लंड निकालने की कोशिश करने लगी. "अच्छा साले गांड मेरी चोद रहे हो और तारीफ़ कमल की कर रहे हो, निकालो मेरी गांड से लंड और कमल की ही चोदो, मैं अब कभी भी अपनी गांड का मजा तुम्हें नहीं दूंगी".

मैंने अपना लंड उसकी गांड में घुसाये रखा और कहा "तुम दोनों से मुझे बराबर प्यार है, लेकिन क्योंकि कमल मेरे मामीजी है. इस लिये उनका हक़ ज़्यादा है, बोलो ठीक है? बस अब रीना मेरी जान प्यार से गांड का मजा दे दो, कुछ ही देर में मैं झड़ जाऊंगा"

रीना मेरे साथ साथ झड़ने को जोर जोर से मुट्ठ मारने लगी. कमल मामी ने कहा "शेरु, तुम अपना लौड़ा गांड से निकाल कर रीना की चूत में डाल दो तो उसकी भी आग बुझ जायेगी, देखो बिचारी खुद ही उंगली डाल कर कर रही है" कहते कहते कमल भी खुद अपनी बुर से खेल रही थी और उंगली अन्दर बाहर कर रही थी. उसकी बुर से पानी बह रहा था.

मैं मामी के उरोजों के निपलों से खेल रहा था जो खड़े होकर एकदम कड़े हो गये थे. मैं साथ साथ रीना की गांड में भी अपना लंड अन्दर बाहर कर रहा था और वह उसे अपने गुदाद्वार से जकड़ कर पकड़े हुई थी.

मैंने कमल से कहा "नहीं, आज तो मैं अपना माल इसकी गांड में ही निकालूंगा, चूत को एक बार फिर चोदूंगा, आज रीना ने मुझे बहुत मजा दिया है, आज मैं इसे खुश कर दूंगा, बहुत प्यारी है इसकी कसी गांड, मेरा लंड मस्त हो गया है, कमल मामी आज तुम भी गांड चुदवा लो, बहुत प्यार से डालूंगा अपना लंड, तुम्हें कुछ भी नहीं होगा, रीना तुम्हें मदद करेगी"

रीना की चूत अब बुरी तरह से चू रही थी, रस अब टपकने लगा था और अपने चूतड़ अब खुद ही मेरे लंड पर पटक पटक कर वह गांड मरा रही थी. चुदासी से मादक सिसकारियां भरती हुई वह बोली "हां कमल, तुम डरो नहीं, मैं तुम्हारी पूरी मदद करूंगी, तुम्हारी गांड को तैयार करूंगी, लंड पर तेल लगाऊंगी, तुम्हारी गांड को चिकना करूंगी, शेरु तुम्हारी गांड को प्यार करेगा, उसे चाटेगा, चूमेगा, चूसेगा, अन्दर जीभ डालेगा, तुम्हारी गांड खुद लंड मांगने लगेगी"

कमल भी अब तक गांड मराने के लिये आतुर हो चुकी थी. "ठीक है, अगर तुम लोग इतना ही चाहते हो कि मेरी गांड फट जाये, शेरु का मोटा लंड खा कर, तो मैं भी तैयार हूं, शेरु को हर ढंग से खुश रखना है, बोलो मेरे चोदू भांजे, ठीक है ना?" कमल ने मुझे चूमते हुए कहा.

मैं बोला "थैंक्स मेरी प्यारी मामी".

रीना की गांड में जोर जोर से चलते हुए मेरे लंड को मामी ने जड़ पर पकड़ा और जबरदस्ती खींच कर रीना की मस्त हुई गांड के बाहर निकाल लिया. मैं बस झड़ने ही वाला था इसलिये रीना गुस्से से चिल्लायी "कमल, साली, लंड क्यों निकाल लिया, क्या तू अपनी गांड मे लेगी, सच बहुत मज़ा आ रहा है, तू बाद में चुदा लेना, मेरी गांड की प्यास बुझ जाने दे, शेरु, हाय डालो ना, मेरी चूत तो झड़ चुकी है"

कमल मेरा तन्नाया लंड रीना की गांड में घुसता देखने के लिये बेचैन थी. उसने अपने हाथों से उसके चूतड़ कस कर फैलाये जिससे उसका गुदाद्वार पूरा खुल गया. मेरा लंड पकड़कर सुपाड़ा रीना के गांड के छेद पर रखा और बोली "चल शेरु, एक ही धक्के में पूरा डाल दो इसकी गांड में, बड़ी चुदक्कड़ बन रही है साली, फाड़ दो इसकी गांड का छेद मादरचोद की गांड मार मार कर".

मैंने उसका कहा मान कर एक जोरदार झटके में अपना पूरा ९ इंच का लौड़ा रीना की कसी हुई गांड में उतार दिया. रीना चिल्ला उठी "मर गयी रे, कमल तुमने मेरी गांड फड़वा डी, मैं भी तुम्हारी आज फड़वा कर रहूंगी" मैं इतना अधीर हो गया था कि दस बारा धक्कों में झड़ गया और मेरा वीर्य रीना की गांड मे स्खलित हो गया. उसकी गांड मेरे लंड को मानों गाय के थनों जैसा दुह रही थी.


पूरा झड़ने के बाद मैनें रीना की गांड में से लंड बाहर खींच लिया. उस टाइट गांड में से निकलते हुए लंड ने पुक्क की आवाज की. मामी अपनी सहेली की गांड की चुदाई देख कर एकदम कामातुर हो गयी थी. उसने मेरा झड़ा हुआ लंड हाथ में लेकर मुठियाना चालू कर दिया जिससे वह जल्दी खड़ा हो जाये. रीना आंखें बन्द कर के अपनी चुदाई और गांड मरवाई का आनन्द लेती हुई आराम से पड़ी हुई थी. उसके दोनों गुप्तांग तृप्त हो गये थे.