desi sex story - गाँव में जन्नत का मजा

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sexy
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desi sex story - गाँव में जन्नत का मजा

Unread post by sexy » 09 Feb 2017 04:55

नमस्ते दोस्तो यह एक सच्ची कहानी है मेरा नाम जितेंद्र कुमार है मै नई दिल्ली रहता हू वैसे यह जो भी घटना हुई है बीते दिनो की है जब मै अपने गाँव गया था मेरा गाँव कानपुर देहात मे है
मेरा परिवार दिल्ली मे रहता है ।
मेरे ताऊ जी प्रताप कुमार
रेल्वे मे नोकरी करते है फैजाबाद मे
इन्ही का परिवार गांव मे रहता है ।
उनके परिवार मे उनकी पत्नी (ताईजी) है
नाम-विमला देवी
उम्र -48
नैन नक्श तिखे है भरा हुआ शरीर बिल्कुल किरन खेर की तरह है दिखने मे , विमला के दो बेटे है सुधीर और नरेश ।
सुधीर की उम्र 28 साल है
नरेश की उम्र 25 साल है
दोनो बेटो की शादी हो चुकी है , सुधीर पैसे कमाने के सिलसिले मे बैंगलोर रहता है ओर नरेश यही गांव रहकर माॅ पत्नी और भाभी की देखभाल करता है । नरेश बहुत मेहनती है खेती का काम करने के साथ साथ गांव से थोडी दूर मार्केट
जाकर छोटी सी नोकरी करता है ।सुबह उठकर खेतो मे काम करना फिर नौ बजते ही नोकरी पर चले जाना ।
सुधीर की बीवी( कजल) दिखने मे दिव्या भारती की तरह थी
फीगर अंदाजन 34 28 36 होगा ।गोरा रंग छलकती जवानी जाहिर सी बात है पति बैंगलोर मे था तो लंड की प्यास तो होगी ही होठो के पास एक तील था जो उसकी हर मुस्कान पर लंड खडा कर देता था
नरेश की पत्नी (अनिता )बहुत संस्कारी थी पूजा-अर्चना करने मे ही व्यस्त रहती थी कोई पराया मर्द अगर उसपर नजर भी डाले तो उसकी खैर नही ।
अब चाचाजी का परिवार
नाम-राघव कुमार
उम्र -50 के आसपास
पत्नी का स्वर्गवास हो चुका है
दो बेटिया एक बेटा
पहली बेटी -शीला
शीला की शादी 2 साल पहले हो चुकी थी
दूसरी बेटी -मीना
जिसकी शादी होने जा रही थी ।
बेटा-विशाल कुमार
मेरे चाचा कानपुर city मे रहते है ।
पडोस मे ही निर्मला देवी रहती है जिनके पती का स्वर्गवास बहुत पहले हो चुका था उनका एक बेटा है जो परदेस मे रहता है
निर्मला चाची अकेले रहती है उनकी देवरानी है देवर है जो उनसे अलग रहते है ।
और भी किरदार है जो जुडते चले जाएंगे दोस्तो अब कहानी पर आता हू
निर्मला चाची अकेली थी उम्र अंदाजन 50 के आसपास होगी
गोरा दुधिया रंग चुचिया तनी हुई हल्का सा पेट बाहर चूतड गोल फूले हुए शायद ही कोई ऐसा हो जो उन्हे देखने के बाद लंड ना सहलाए । गांव पहुचा मेरे परिवार को छोड़कर सबका परिवार उपस्थित था प्रताप कुमार भी आए थे और चाचा राघव कुमार का पूरा परिवार था ।
मै गांव पहुचा सबने मेरा स्वागत किया, करते भी क्यू ना 4 साल बाद जो गया था काजल भाभी से पहली बार मिला था बात तो नही की थी बस पहली बार देख रहा था वो भी मुझे देख रही थी फिर वो खाना बनाने चली गई अनिता भाभी मायके गई थी उनके मा की तबियत खराब थी इसलिए देखभाल करने के लिए वो गई थी । अभी शादी मे 15 दिन बाकी थे मेरे घर मे 7 कमरे है और एक बडा सा अंगना है आंगन मे नल है सभी वही नहाते कपडे धोते है । मै अपने कमरे मे बैठा था अचानक मुझे एक फोन आया कमरे मे नेटवर्क नही था तो मै बाहर निकलकर जाने लगा ...............
जैसे ही आंगन तक पहुचा मै सन्न रह गया आंगन मे काजल भाभी अपनी साडी गांड तक उठाकर मुतने बैठी थी मुझे देखकर वो चौक गई लेकिन खडी नही हुई शर्म के कारन मै तुरंत कमरे मे चला गया मुझे बार बार वही सब याद आ रहा था उनकी गोरी गांड ही नजरो के सामने आ रही थी ।फिर थोडी देरबाद खाना खाने का समय हुआ सबको काजल भाभी अपने कमरे मे खाना दे रही थी ,वह मेरे लिए अब भी अजनबी थी क्यूकी हमारी बात नही हुई थी अबतक । काजल भाभी मेरे कमरे मे आई
भाभी - जितेंद्र बाबू ये खाना खा लिजिए वरना ठंडा हो जाएगा
मै- भाभी वो सुबह आंगन मे , वो मै गलती से मुझे पता नही था आप वहा...
भाभी - कोई बात नही बाबू ।
(और मुस्कुराती हुई )बाहर चली गई ।
मै खाना खा ही रहा था कि भाभी वापस आई
भाभी -बाबू और और कुछ लाऊ रोटी दाल
मै - नही भाभी पेट भर गया
भाभी -खा लिजिए गरम मै सबको इतना गरम नही मिलता ।
(और आकर जबरदस्ती रोटी प्लेट मे डालने लगी )
जोर जबरदस्ती करने के कारन उनका पल्लू गिर गया और मेरे आखो के सामने उनकी बडी बडी चूचिया आ गई जो बलाउज से बाहर झाकने की कोशिश कर रही थी ।उनहोने अब भी पल्लू नही संभाला मै चुचिया देख रहा था रूई की तरह सफेद बडी बडी ।इतने मे वो खडी हुईऔर बाहर चली गई ।खाना खाने के बाद मै सो गया।
शाम को आख खुली विशाल मुझे जगा रहा था
विशाल - कितना सोता है भाई तू चल मेरे साथ ताईजी को पूजाकरने के लिए फूल चाहिए
मै-कहा चलना है
विशाल -यही पडोस मे निर्मला चाची के यहा
(दोस्तो निर्मला चाची अकेली रहती है सो उन्होंने अपने घर के आगे फुलवारी लगाई है ताईजी रोज उनके यहा से फूल लेती थी )
मै और विशाल निर्मला चाची के यहा पहुचे वो उकडू बैठकर छोट सा गड्ढा खोद रही थी
विशाल ने आवाज दी
विशाल - चाची कहा बाडू हो ?
चाची - हा बेटवा , आवा बैठा
( उनका पल्लू जमीन पर गिरा था उकडू बैठे होने की वजह से उनके घुटने से चूचिया दबकर फूल गए थे )
मै यह देखने लगा विशाल जाकर खटिया पर बैठ गया मै दूर खडे होकर चाची के चुचियो को देख रहा था । लंड खडा होने लगा अचानक चाची की आवाज सुनकर होश आया
चाची - अरे जितेंद्र बेटवा कैसे हो
मै -(हडबडाते हुए ) ठीक हू चाची ।
चाची - बहुत दिन बाद गाव आए हो पहचान रहे हो ना
मै-हा चाची ।
चाची -अरे विशाल बेटा,नरेश कहा है उससे बोली थी मजदूर लगा दे मेरे खेतो मे कटाई करनी है सबका गेंहू कट गया मेरा अबतक नही कटा अकेली हू तो सारे काम बच जाते है ।
विशाल -ठीक है नरेश भईया से बात करता हू
मै- काकी मै काट दू आपकी फसल मुझे मजदूरी दे देना
काकी - अरे बेटा तेरी काकी का खेत बहुत बडा है तू नही काट पाएगा काकी की फसल को (हसने लगी) काकी जौन मजदूरी देगी तुझे पसंद भी नही आएगी ।
(विशाल हसने लगा) मेरी कुछ समझ मे नही आयाआ पर थोडी देर बाद समझ गया कि शायद काकी डबल मिनिंग मे बोल रही है ।
फिर हमने फूल लिए और वहा से वापस आ गए ।

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Re: desi sex story - गाँव में जन्नत का मजा

Unread post by sexy » 09 Feb 2017 04:56

घर आकर हमने फूल ताई जी को दिए । वी मंदिर चली गई विशाल बाहर गाय को चारा डालने लगा ,मै घर के अंदर गया घर मे काजल भाभी सबके कमरे मे झाडू लगा रही थी । फिर वो मेरे कमरे मे आई , मै बेड पर पैर नीचे लटका कर बैठा था । भाभी बोली
भाभी -बाबू पैर उपर कर लिजिए झाडू लगाना है
मै-ठीक है भाभी
भाभी झुकर झाडू लगाने लगी पल्लू चुचियो पर से गिर चुका था
मै उनकी चुचियो को देखने मे मगन हो गया । वो जानती थी मै उनकी चुचियो को देख रहा हू इसलिए जानबूझकर और झुककर झाडू मारने लगी ।
मेरा लंड उठने लगा , मेरे लोवर मे तंबू बन चुका था अचानक वो खडी हो गई
भाभी- लग गया झाडू अब घर के और काम ........(अचानक उनकी नजर मेरे तंबू पर पडी ) वह चुप हो गई
और साड़ी के उपर से ही अपने चूत को सहलाकर बाहर जाने लगी
मै - भाभी , सुनिए (और मै खडा हो गया जिस वजह से पूरे लंड की लंबाई पता चल रही थी )
भाभी -क्या हुआ बाबू
मै -वो एक कप चाय मिलेगी बहुत थकान सी है
भाभी -हा तो ले लिजिए ना ,मैने कब मना किया है
(और हसकर बाहर चली गई )
मै अपने कमरे मे ही बैठा निर्मला काकी और भाभी के बारे मे सोचकर लंड सहला रहा था फिर अचानक भाभी कमरे मे आई चाय लेकर
भाभी -बाबू आपकी चाय
(आवाज सुनकर मैने तुरंत ही लंड को छोड दिया )
मै - ह ह हाॅ भाभी
मैने चाय ली और पीने लगा भाभी मुस्कुराते हुए बाहर चली गई
लेकिन एक बात मै समझ चुका था कि भाभी को चुदाई का सुख नही मिल पा रहा , चाय पीने के बाद मै बाहर चला गया विशाल के साथ गांव के चौराहे पर सबने मेरा हाल चाल पूछ परिवार के बारे मे पूछा ।
अंधेरा होने लगा था हम घर की तरफ चल दिए
घर आए तो बाहर निर्मला काकी ,ताई जी और भाभी को आवाज दे रही थी
मै घर मे गया और भाभी से पूछा
मै- भाभी काकी क्यू बुला रही है
भाभी - बाबू वो शाम को हम खेतो की तरफ जाते है (और मुस्कुराने लगी )
मै समझ गया की ये लोग हगने जा रहे है
भाभी चली गई ,मेरा दिमाग बार बार उनकी बाते सोच रहा था
फिर मै फौरन छत पर गया वहा से देखने लगा की वो लोग किस तरफ हगने जा रही है (आप सबको बता दू मेरा घर गांव से थोड़ा बाहर है और घर के आसपास थोड़ी दूरी पर बाॅस के पेड है )
मैने देखा की वो तीनो उसी बसवारी की तरफ जा रही है
मैने सोच लिया था कि कल से उन से पहले मै ही वहा जाकर हगने का नाटक करूंगा और उनकी गांड और चूत देखूंगा
फिर रात को खाना खाकर सब सो गए ।.
.

.
अगली सुबह
भाभी - उठिए बाबू सुबह हो गई, चाय ठंडी हो जाएगी (इतना कहकर भाभी ने मेरे शरीर से चादर खीच लिया )
चादर हटते ही उनके सामने मेरा खडा लंड आ गया जो पैंट से बाहर था (रात को मुठ मारने के बाद मैने लंड को पैंट के अंदर नही डाला था तुरंत नींद आ गई थी )
यह सब देखकर भाभी तुरंत कमरे से बाहर चली गई और रसोई मे जाकर जोर जोर से हसने लगी ।उनकी हसी सुनकर मुझे अहसास हुआ और मै तुरंत उठकर बैठ गया
मै बाहर जाने लगा जैसे ही रसोई के पास से गुजरा भाभी और हसने लगी
मै रसोई मे गया और बिना उनसे आख मिलाए
मै - भाभी वो मै ,पता नही कैसे , पलीज भाभी किसी से कहिएगा नही
(वो हसे जा रही थी )
भाभी -अरे देवर बाबू लेकिन ।
मै - भाभी प्लीज मत कहना किसी से
भाभी- अरे ऐसी बाते किसी से कही थोड़ी ही जाती है आपने भी तो उस दिन आंगन मे मेरा पिछवाडा देख लिया था
मै-क्या भाभी
भाभी - (करीब आकर )अरे मेरी गांड ना देख ली थी अचानक आपने
मै - माफ करना भाभी गलती हो गई
भाभी - नही ये सब होते रहता है इतना बडा घर है कोन कहा है किसको पता
मै -जी भाभी
भाभी - बाबू एक बात पूछू
मै -हा भाभी पूछिए
भाभी - उस दिन आपने मेरी गांड देख ली थी ,कैसी लगी आपको ?
(मै शाॅक हो गया )
मै -भाभी ये आप क्या बोल रही है
भाभी -बोलिए ना बाबू मुझे तो आपका देखकर अच्छा लगा आप तो ऐसे शर्मा रहे है जैसे कवनो नई नवेली दुल्हनिया
(मै मन मे "साली तेरी गांड मिल जाए तो पेलपेलकर फाड दू")
मै -भाभी वो आपकी गां..... (इससे पहले मै कुछ बोलता बाहर से विशाल आता है )
विशाल - भाभी चाय बनी की नही ?पापा और ताऊजी कबसे चाय मांग रहे है
भाभी -हा विशाल बाबू ले जाइए चाय
(विशाल ने चाय ली और बाहर जाने लगा मै भी उसके साथ बाहर को चल दिया ) जाकर ताऊ जी के पास बैठ गया
ताऊ जी मेरी पढ़ाई के बारे मे पूछने लगे (इतने मे निर्मला काकी आती है )
काकी -प्रताप बाबू नरेश बेटवा कहा है ?
ताऊजी - वो तो दुकान चला गया
काकी - मजदूर नही मिल रहे खेत की फसल खराब ना हो जाए
ताऊजी -विशाल और जितेंद्र को ले जाईए भाभी ये दोनो काट देंगे
मै - हा काकी बस एक बार बता देना कैसे काटते है मै भी काट लूंगा फसल
काकी-ठीक है बेटवा विशाल को बुला लाओ
(विशाल अपने कमरे मे जा चुका था मै विशाल के पास जाता हू उससे बात करके बाहर आता हू )
मै -(निराश होकर की साला काकी को ताडने का मौका हाथ से गया ) काकी वो विशाल रसोई गैस लेने बाजार जा रहा है शाम तक लोटेगा तो मै अकेले ...
काकी- कोई बात नही बेटवा तू ही चल मै सीखा दूंगी
मै- (खुश होकर) ठीक है काकी अभी आया ।.........
मै और काकी खेत कि तरफ चल पडे ।काकी का खेत काफी दूर था था गांव से बाहर सबकी फसल कट चुकी थी तो उस तरफ किसी का आना जाना नही था ।बहुत कम लोग ही सुबह सुबह उस तरफ जाते ।
काकी के खेत के चारो तरफ सरपत की झाडिया थी जो खेत को चारो तरफ से घेर लेती थी ।
काकी ने एक पतली साडी पहन रखी थी सफेद रंग का ब्लाउज उनहोने ब्रा नही पहनी थी और मुझसे दो कदम आगे चल रही थी
मै-काकी कितनी दूर है आपका खेत
काकी -बस बेटवा आ गए थोडी ही दूरी रह गई है ।
(जिस काकी को मै कभी गलत नजर से नही देखता था वो मेरे आगे आगे अपने भारी भरकम गांड मटका कर चल रही थी )

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Re: desi sex story - गाँव में जन्नत का मजा

Unread post by sexy » 09 Feb 2017 04:56

मै -काकी दोपहर मे जब भूख लगेगी तो हम क्या खाएँगे
काकी -बेटवा वही खेत के बगल मे गन्ने का खेत है वो भी अपना ही है वहा से गन्ने तोड़कर चूस लेंगे ।
मै-नही काकी मै बिना खाए नही रह पाउंगा भूख बर्दाश्त नही होती
काकी -अरे बेटवा घबराता काहे है मैने रोटी बांधकर रख ली है ।और हा तेरी काजल भाभी आ जाएगी तेरे लिए खाना लेकर ।
मै-अच्छा काकी
काकी -हा बेटे । अच्छा तू मुझे गन्ना तो देगा ना मुझे बहुत शौक हे चूसने का
मै -हा काकी मै आपको खूब मोटावाला गन्ना दूंगा
(हलकी धूप के कारन काकी का शरीर चमक रहा था 50 की उम्र मे भी कामुक लग रही थी )
काकी -अच्छा बेटवा तू मेरी फसल अच्छे से काट तो लेगा ना
मै -हा काकी बस आप एकबार बता दिजिये कैसे काटना है मै काट लूंगा ।
काकी - हा बेटवा ।तू कितना प्यारा है जो मेरे लिए इतना कर रहा है काहे जाकर शहर रह गया तेरा बाप काश तुम सब यहा होते तो चहल-पहल होती गांव सूना लगता है
मै -हा काकी "गांव से अच्छा कुछ नही" मुझे भी मन नही करता शहर जाने को लेकिन पढ़ाई के लिए
काकी -मै तो बिल्कुल अकेली हू तुम सब हो तो मेरे सारे काम हो जाते है वररना ये खेती बारी मेरे बस की बात नही । बेटा है तो जाकर परदेस बस गया है माॅ का जरा भी ख्याल नही उसे
मै - नही काकी ऐसी बात नही भईया तो पैसे कमाने ही गए है जलदी आ जाएगे ।
*
इसी तरह बाते करते करते हम खेत की तरफ जा रहे थे खेत बस 10 कदम दूर रह गया था की काकी रूक गई मै भी उने पास जाकर खडा हो गया हमने देखा की एक बैल गाय को चोद रहा था काकी की नजर तो मानो जैसे बैल के लंड पर ही टिक गई ।
उनके हाथ अपने-आप ही अपने चूत पर साडी के उपर से सहलाने लगे ।
इतने मै बैल ने एक जोरदार शाॅट मारा और गाय चिल्लाने लगी
काकी का ध्यान टूटा वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए खेत मे घुस गई मै भी उनके पीछे पीछे उनकी गोल गुदाज गांड को निहारते हुए खेत मे चला गया ।(काकी मुझे समझाते हुए,)
काकी - देख बेटवा इस तरह काटी जाती है फसल
मै - जी काकी
और हंसिया हाथ मे लेकर गेहू की फसल काटने लगा ,काकी शायद अब भी गाय और बैल की चुदाई के बारे मे सोच रही थी और उकडु बैठकर मेरे पास से ही एक लाइन मे फसल काट रही थी ।
उनका पल्लू नीचे खिसक चुका था मेरा ध्यान जब इस तरफ गया तो मै उनकी चुचियो देखने की कोशिश करने लगा
मै - काकी आपको बहुत मेहनत पड जाती होगी ना
काकी -नही बेटवा अकेली हू मेहनत तो नही लगती सारे काम जलदी हो जाते है बस कोई हाल पूछनेवाला नही है
मै - कैसी बात करती हो काकी हम सब है ना आपके साथ आपके परिवार की तरह ही
(और उनकी चुचियो को देखे जा रहा था वो जानती थी मेरी नजर कहा पर है फिर भी उन्होंने चुचियो को ढकने की कोशिश नही की ये देखकर मेरा लंड और सिर उठाने लगा और फसल काटने मे ध्यान नही लग रहा था )
मै- काकी आपसे एक बात पूछू
काकी - हा बेटवा पूछ
मै - ( भोला बनते हुए) काकी जब हम खेत आए तो वो बाहर दोनो गाय क्या कर रही थी
काकी - हाहाहाहाहा अरे बुद्धु वो गाय नही उसमे से एक गाय और एक बैल है
मे -अचछा काकी वो गाय और बैल क्या कर रहे थे एक दूसरे के नीचे ( मेरी गांड फट रही थी ये सब पूछते हुए लेकिन मै अपनी किस्मत आजमा रहा था )
काकी - अरे बेटवा उ बैल गाय को प्यार कर रहा था ( अपनी चूत को उपर से सहलाते हुए )
मै - ये कैसे काकी कैसा प्यार
काकी - अरे बेटवा उ बैल पीछे से अपना लं.........
मै - (काकी की बात पूरी होती कि बीच मे मै ) आहहहहहहहहहहहहहहह काकी आहहहहहहहहहहहहहहह
काकी - क्या हुआ बेटवा
मै - काकी वो गेहू काटते हुए हंसिया से उंगली कट गई है
काकी - हायययययय रामम। उंगली काट ली अब घर वाले कहेंगे की बेटवा की उंगली कटवा दी
मै - अ आआआआआआआहहहहहहहहह काकी ऐसी बात नही है बस खून रूकना बंद हो जाए
काकी - ला देखू तो कहा लगी है (मै उठकर काकी के पास जाकर बैठ गया ) काकी का पल्लू अब भी जमीन पर था चुचियो का रंग और शेप देखकर लंड खडा होने लगा ।