तीन घोड़िया एक घुड़सवार compleet

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kamdevbaba
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Re: तीन घोड़िया एक घुड़सवार

Unread post by kamdevbaba » 03 Nov 2014 13:43

एक बुजुर्ग चश्में की दुकान पर पहुंचे और बोले "बेटा एक बढ़िया चश्मा बना दो"
दुकानदार ने चश्मा बना के दिया और बुजुर्ग चला गया!
थोड़ी देर बाद फिर आ गया! बोला "बेटा पिक्चर साफ नहीं दिखती"
दुकानदार "ठीक है बाबा लाइये दूसरा बना देता हूं!"
इस तरह पूरा दिन बुजुर्ग दुकान पर बार-बार आता रहा और चश्मे वाला चश्मा बनाता रहा"
मगर बुजुर्ग की परेशानी खत्म न हुई!
आखिर परेशान होकर दुकानदार ने पूछा "बाबा कौन सी पिक्चर साफ नहीं नहीं दिखती"


बुजुर्ग ने मोबाइल निकाला और whatsaap खोलते हुये कहा "बेटा देखो जितनी भी इमेज दोस्तों ने भेजी हैं सब धुंधली नजर आ रही हैं"
इमेज देखकर दुकानदार "माथा पीटते हुए बोला - बुड्ढे खूसट तूने जिंदगी नाश कर दी! भोसड़ी के इसे डाउनलोड तो कर पहले"

rajaarkey
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Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: तीन घोड़िया एक घुड़सवार

Unread post by rajaarkey » 03 Nov 2014 13:49

show8814 wrote:एक बुजुर्ग चश्में की दुकान पर पहुंचे और बोले "बेटा एक बढ़िया चश्मा बना दो"
दुकानदार ने चश्मा बना के दिया और बुजुर्ग चला गया!
थोड़ी देर बाद फिर आ गया! बोला "बेटा पिक्चर साफ नहीं दिखती"
दुकानदार "ठीक है बाबा लाइये दूसरा बना देता हूं!"
इस तरह पूरा दिन बुजुर्ग दुकान पर बार-बार आता रहा और चश्मे वाला चश्मा बनाता रहा"
मगर बुजुर्ग की परेशानी खत्म न हुई!
आखिर परेशान होकर दुकानदार ने पूछा "बाबा कौन सी पिक्चर साफ नहीं नहीं दिखती"


बुजुर्ग ने मोबाइल निकाला और whatsaap खोलते हुये कहा "बेटा देखो जितनी भी इमेज दोस्तों ने भेजी हैं सब धुंधली नजर आ रही हैं"
इमेज देखकर दुकानदार "माथा पीटते हुए बोला - बुड्ढे खूसट तूने जिंदगी नाश कर दी! भोसड़ी के इसे डाउनलोड तो कर पहले"




हा हा हा क्या बात है दोस्त मस्त चुटकला है

rajaarkey
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Re: तीन घोड़िया एक घुड़सवार

Unread post by rajaarkey » 05 Nov 2014 04:43

गतान्क से आगे...................

तभी रश्मि की आवाज़ सुनाई दी, मम्मी, ओ मम्मी तभी दोनो मा बेटे को होश आता है और वह दोनो अलग अलग हो जाते है और रश्मि कमरे के अंदर आ जाती है, मम्मी भाभी चाइ बना रही है क्या आपको भी चाइ पीना है, गीता हाँ बेटी थोड़ी सी मुझे भी दे देना, रश्मि और अजय तू, हाँ दीदी मैं भी पी लूँगा, और तीनो रूम के बाहर निकल जाते है.

रश्मि छत पर कपड़े उठाने के लिए चली जाती है तब गीता धीरे से अजय से कहती है बेटा

आज रात को मैं तेरे कमरे मे आउन्गि तब तू मेरी कमर और पैरो की मालिश ज़रूर कर देना

बहुत दर्द कर रहे है, अजय बिल्कुल मम्मी आप की जब इच्छा हो आप आ जाना, तब गीता बेटे

तुझे और कोई काम तो नही है ना रात को, नही मम्मी आपके लिए सब काम कॅन्सल कर दूँगा,

गीता अच्छा ठीक है जा किचन मैं जाकर देख आरती ने चाइ बना ली क्या, अच्छा मा,

किचन मैं अजय अपनी भाभी के पास आकर क्या कर रही हो भाभी, आरती चाइ बना रही हू

पीएगा, अजय आरती के पीछे आकर उसकी मोटी गदराई गोलाईयो को कस कर मसल्ते हुए मेरी

रानी तुम्हे तो मालूम है मैं सिर्फ़ दूध पीना पसंद करता हू और वो भी ऐसी जवान

घोड़ियो का, आरती अजय का लंड अपने हाथो मे दबोचते हुए अरे सबसे ज़्यादा मस्तानी

घोड़ी तो तेरी मा है जा के अपनी मा का दूध दबा और मसल अपनी भाभी के पीछे क्यो

पड़ा है, ओह भाभी आज तो मज़ा आ गया , आरती क्यो अपनी मम्मी को चोद के आ रहा है क्या,

अरे नही भाभी पर आज मैने मम्मी को मसला और वो भी बड़े प्यार से मुझसे अपना

गदराया बदन मसलवा रही थी, आरती ऐसा कैसे हुआ,

अजय भाभी मम्मी सिर्फ़ मॅक्सी पहन

कर मुझसे चिपकी हुई थी मैं जब मम्मी के गदराए बदन से चिपका तो मुझे तो ऐसा लग

रहा था कि मम्मी पूरी नंगी है, मैं तो पागल हो गया और मैने उसके मोटे दूध को

आज सचमुच कस कर दबा दिए बिल्कुल इस तरह और अजय ने अपनी भाभी के मोटे मोटे बोबे

को खूब कस कर मसल देता है, आरती आह क्या सचमुच तूने इतने तेज तरीके से अपनी मम्मी

के दूध दबाए है, अजय हाँ भाभी, और आज तो मैं कुछ ज़्यादा ही आगे बढ़ गया, आरती क्यो

और ऐसा क्या कर दिया तूने भाभी मैं आज इतना जोश मे आ गया कि मुझसे रहा नही गया

और मैने अपनी मम्मी की चूत को अपने हाथो मे भरकर कस कर दबोच लिया बिल्कुल इस

तरह और अजय ने अपनी भाभी की चूत को साडी के उपर से ही अपनी मुट्ठी मे भरकर कस कर

दबोच लिया,

आरती आह देवेर जी, पर देवेर जी फिर मम्मी जी का क्या रिक्षन था, अरे भाभी

मम्मी की चूत तो पहले से ही अपने बेटे के लंड के लिए पानी छ्चोड़ रही है वह चुपचाप

मुझसे चिपक गई, मम्मी की चूत भाभी इतनी फूली हुई थी जैसे डबल पाव रखे हो, आज तो

मज़ा आ गया भाभी, ऐसा गदराया माल चोदने को जिस दिन मिलेगा उस दिन तो मज़ा आ जाएगा,

आरती अजय के मोटे डंडे को मसल्ते हुए तो अब क्या करना चाहता है मेरा प्यारा देवेर अपनी

मा के साथ, भाभी जब से मैने मम्मी की पाव रोटी जैसी चूत को च्छुआ है तब से बस उसकी

मस्त फूली हुई कचोड़ी जैसी चूत की मोटी फांको को फैलाकर चाटना चाहता हू,

आरती वाह मेरे

देवेर जी लोग तो अपनी मा का दूध पीते है, मेरा राजा तो अपनी मम्मी की चूत पीने के लिए

तरस रहा है, चिंता ना करो देवेर जी तुम्हारी मम्मी भी अपनी फूली चूत मे तेरा मोटा

लंड खाने के लिए तड़प रही होगी और जल्दी ही तुझे अपनी चूत पूरी नंगी करके चाताएगी, ओह

भाभी क्या बात कही है आपने आपके मूह मे गीयी शक्कर, आरती अरे मेरे मूह मे घी

शक्कर के बजाय ये लंड दे देना वो भी आज ही रात को, नही भाभी आज तो मम्मी के पैरो

और कमर की मालिश करने है मम्मी ने कहा है, आरती अजय मुझे तो लगता है तेरी मम्मी

तुझसे मालिश करवाने के बहाने आज अपनी चूत दिखाने और डबवाने के लिए आने वाली है,

और दोनो मुश्कुरा कर चाइ लेकर बाहर आ जाते है,

दोपहर को गीता अपने रूम मे कोई नॉवेल पढ़ रही थी तभी अजय अपनी मा के रूम के अंदर

आ गया और मा के बगल मे बेट पर लेटते हुए क्या पढ़ रही हो मा, कुच्छ नही बेटा बस ये

नॉवेल पढ़ रही, नॉवेल का नाम था “शाकाहारी खंजर” दोस्तो कभी मोका लगे तो आप भी

पढ़ना बड़ा ही रोमांचकारी नॉवेल है, यह तीन पार्ट मे है, गीता दूसरा पार्ट पढ़ रही

है, इसके पहले पार्ट का नाम है “कातीलो के कातिल” और इसका तीसरा पार्ट का नाम है “मदारी”

इसके राइटर का नाम मुझे ठीक याद नही है लेकिन यह नॉवेल या तो वेद प्रकाश शर्मा या फिर

अभय पंडित का है.

मा क्या अभी आपके पैरो औ कमर की मालिश करू, गीता नही बेटे अभी मैं थोड़ा सोना चाहती हू रात को तेरे रूम मे आती हू फिर तू अच्छे से आज मालिश करके मेरा सारा दर्द मिटा देना मा तुम फिकर मत करो आज मैं आज रात को आपके सारे बदन की ऐसी मालिश करूँगा कि आप का रोम रोम खिल उठेगा और आप बिल्कुल मस्त हो जाओगी, अच्छा मा अब आप सो जाओ मैं जाता हू, और अजय उठ कर बाहर आ जाता है,