घरेलू चुदाई समारोह compleet

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007
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Re: घरेलू चुदाई समारोह

Unread post by 007 » 28 Oct 2014 15:51

कोमल को इस बात से कोई परेशानी नहीं हुई कि प्रेम इतनी जल्दी स्वाहा हो गया। वो तो अमृतपान में व्यस्त थी। और उसे विश्वास था कि वो प्रेम को जल्द ही फ़िर से सम्भोग के लिये तैयार कर लेगी- “पिला दो मुझे अपना रस…” जब प्रेम के रस की पिचकारी ने पहला विश्राम लिया तो कोमल अपना मुँह खोलकर बोली। कोमल को लण्ड चूसना इतना अच्छा लग रहा था कि वो उसे छोड़ने को राजी नहीं थी। उसने जब तक उसे पूरी तरह सुखा नहीं दिया, छोड़ा नहीं।

प्रेम थक कर बिस्तर पर लेट गया- “अभी मैं और नहीं कर सकता, मैनें बहुत औरतें देखीं, पर तुम सी…”

कोमल मुश्कुराई और उसके ऊपर आ लेटी। “रंडी…” वो बोली- “अगर तुम मुझे रंडी कहोगे तो मैं बुरा नहीं मानूंगी। बल्कि शायद मुझे अच्छा ही लगे। मैं चाहती थी कि आज तुम मुझे एक रंडी की तरह ही चोदो। आज मैं वैसे ही चुदी जैसे सालों से चाहती थी। मेरे पति एक बहुत अच्छे आदमी हैं, इसलिये कभी इस तरह पेश नहीं आते…”

“मै समझ सकता हूँ जो तुम कहना चाहती हो। मेरी पत्नी भी सैक्स के प्रति बहुत सीधी है। तुम्हें विश्वास नहीं होगा मैने आज तक उसके मुँह में अपना लण्ड नहीं डाला है…”

“तो आज की रात हम एक दूसरे की सहायता करेंगे…” कोमल ने प्रेम को चूमते हुए कहा- “और ऐसा क्या है जो तुम तो चाहते हो पर वो नहीं करने देती… तुम चाहो तो मेरे मम्मों की भी चुदाई कर सकते हो। वाह देखो, यह फ़िर से मेरे लिये खड़ा होने लगा है…” कोमल ने अपनी विशाल गोलाइयों को उसपर झुकाते हुए अपने हाथों से उन्हें दबाया- “तुम चाहो तो मेरे मम्मों को चोद सकते हो…”

“मेरी पत्नी तो मुझे कभी ऐसा न करने दे…” प्रेम ने अपने लण्ड को कोमल की चूचियों के बीच में चलाना शुरू कर दिया।

“चोदो मेरे मम्मों को…” न जाने क्यों वो इस आदमी के साथ वो सब करना चाहती थी जो उसकी पत्नी उसे नहीं करने देती थी। है भगवान, यह कितना गर्म लग रहा है यहाँ पर। सुनील ने कभी ऐसा नहीं किया था और वो यह सब न जाने कब से करने को बेताब थी। सुनील को हमेशा यह डर रहता था कि कोमल को कहीं इससे तकलीफ़ न हो। काश… उसे पता होता। इसी कारण से और भी कुछ था जो सुनील ने कभी नहीं किया था।

“क्या तुमने कभी अपनी बीवी की गाण्ड मारी है…” कोमल ने अपने मम्मों को प्रेम के लण्ड पर और जोर से दबाते हुए पूछा।

“अगर मैं उससे पूछूंगा भी तो वो मर जायेगी। क्या तुम यह कहना चाहती हो कि तुम मुझसे अपनी गाण्ड भी मरवाना चाहती हो…”

इसके जवाब में कोमल ने अपने शरीर को इस तरह मोड़ा की उसका पिछवाड़ा प्रेम के मुँह की तरफ़ हो गया। “मेरी गाण्ड मारो, अपने इस मूसल से मेरी गाण्ड की धज्जियां उड़ा दो…” कोमल ने जवाब दिया।

प्रेम कोमल के पीछे गया और उसने कोमल के पिछवाड़े को पकड़कर उसके इंतज़ार करते हुए छेद पर एक नज़र डाली। वो इस दृश्य का भरपूर आनंद उठाना चाहता था।

“जल्दी करो… मुझे इस बात की बिलकुल परवाह नहीं कि मुझे दर्द होगा…” कोमल ने मिन्नत की। उसने अपने हाथ पीछे करते हुये अपने कद्दू से पुट्ठों को फ़ैलाया जिससे कि उसकी गाण्ड का छेद प्रेम के लिये और खुल गया। अब कोई शक नहीं था कि वह मूसल सा लौड़ा किस रास्ते को पावन करेगा।

प्रेम का लौड़ा अपने मदन रस से गीला था, उसे किसी और चिकनाहट की आवश्यकता नहीं थी। उसने अपने लण्ड का सुपाड़ा गाण्ड के मुहाने पर रखा और धुंआंधार धक्का मारा।

“अरे मरी रे… इसमें तो बहुत दर्द होता है…” जैसे ही प्रेम के सुपाड़े ने गाण्ड को छेदा तो कोमल चीख उठी। उसके शरीर में एक तीव्र वेदना उठी। एक मिनट के लिये तो उसकी सांस ही बंद हो गई, और गाण्ड… उसके दर्द की तो कोई इंतहा ही नहीं थी।

जब वो थोड़ा सम्भली तो बोली- “ओके प्रेम अब पूरा पेल दो अपना लण्ड मेरी गाण्ड में…”

“क्या इसमें बहुत दर्द होता है…” प्रेम ने पूछा। उसने नीचे देखा पर समझ नहीं पाया कि उसका पूरा लण्ड इतनी संकरी गली में कैसे घुस पाया था।

“और नहीं तो क्या, जान निकल जाती है…” कोमल अभी भी तकलीफ़ में थी- “पर मुझे परवाह नहीं, तुम जितनी जल्दी इसकी चुदाई शुरू करो उतना ही अच्छा है। मैं जल्द ही आदी हो जाऊँगी…” उसने अपनी गाण्ड को पीछे धक्का दिया जिससे कि लण्ड थोड़ा और अंदर जाये।

क्रमशः.............


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Re: घरेलू चुदाई समारोह

Unread post by 007 » 28 Oct 2014 15:52

प्रेम ने धीरे से आगे की ओर धक्का दिया। उसे अभी भी यह चिंता थी कि कहीं कोमल को चोट न पहुंचे। उसका लण्ड इतनी जोर से फ़ंसा हुआ था जितना आज तक कभी नहीं हुआ था। हालांकि उसे इस बात की फ़िक्र थी कि कोमल की गाण्ड को कोई नुकसान न हो पर अब उसे यह भी ख्याल आ रहा था कि ऐसा न हो कि इस आक्रमण में उसका लण्ड ही शहीद हो जाए। उसका जैसे-जैसे लण्ड अंदर समा रहा था उसे अपनी रक्त-धमनियों पर दबाव बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था।

“मुझे ऐसा लग रहा है जैसे तुम मुझे दो टुकड़ों में चीर रहे हो…” कोमल ने अपना मुँह तकिये में गड़ाकर गहरी सांस लेते हुए कहा। आखिर यह पहला लण्ड था जिसने उसकी मखमली गाण्ड को चीरा था- “पर तुम ऐसे ही लगे रहो प्रेम, जब तक कि तुम्हारा लण्ड जड़ तक नहीं समा जाता…”

प्रेम ने ऐसा ही किया। उसने देर न करते हुए एक जोरदार शानदार धक्का मारा और अपने लौड़े को कोमल की गाण्ड में जड़ तक पेल दिया। फ़िर वो कुछ देर सांस लेने के लिए ठहरा। गाण्ड की माँसपेशियों का दबाव और स्पंदन वो महसूस कर पा रहा था। एक पल तो उसे लगा कि वो तभी वहीं झड़ जायेगा।

“फ़िर से डालो, प्रेम…” कोमल ने विनती की।

जब प्रेम थोड़ा सम्भला तो उसने अपना लण्ड बाहर खींचा और फ़िर दुगने जोश से वापस ठोंक मारा। कोमल की स्वीकृती पाकर उसने ऐसा ही एक बार और किया, फ़िर और… फ़िर और…

“यही तरीका है। इसमें तकलीफ़ जरूर होती है, पर अब थोड़ी कम है। मुझे यह बेहद पसंद आ रहा है। मुझे पता था कि मुझे गाण्ड-पेलाई पसंद आयेगी…”

कोमल को उसके गंतव्य तक शीघ्र पहुंचाने के लिये प्रेम ने अपना हाथ बढ़ाकर कोमल की चूत को ढूँढ़ा और अपनी एक उंगली उस बहती हुई नदी के उद्गम में डाल दी।

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Re: घरेलू चुदाई समारोह

Unread post by 007 » 28 Oct 2014 15:52



कोमल के लिये अब यह बता पाना कि क्या पीड़ा थी और क्या आनंद मुश्किल हो चला था। उसकी चूत और गाण्ड दोनों में चल रहे आनंद को वो बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। दोनों यही संकेत दे रहे थे कि अब बांध ढहने को है।

“प्रेम और जोर से… तेज़ और तेज़… मार लो मेरी गाण्ड, अपने रस से मेरी गाण्ड भर दो…”

प्रेम भी यही सुनना चाहता था- “ए बेबी तुम तो मेरा लण्ड ही छील डालोगी…” वो चिल्लाया। कोमल की गाण्ड ने उसके लण्ड पर जकड़ बढ़ा दी थी। इस कारण वह ठीक तरह से झड़ भी नहीं पा रहा था। इसी कारण उसे अपना लण्ड खाली करने में काफी देर लगी।

कोमल और भी बहुत देर तक मैदान में टिकी रहती पर प्रेम अब थक चुका था। यह देखकर कोमल तकिये पर सहारा लेकर लेट गई। वो सोच रही थी कि आज उसने सच में एक आदमी से अपनी गाण्ड मरवा ही ली थी। आज उसने दो काम ज़िंदगी में पहली बार किये थे। अपने पति से दगा और गाण्ड मराई।

दूसरे दिन कोमल सजल को लेने उसके कालेज गई। उसकी चूत कल की चुदाई को अभी भुला नहीं पाई थी और अभी तक रुक-रुक कर अपनी खुशी ज़ाहिर कर रही थी। प्रेम ने जब उसके घर का पता और फ़ोन नंबर माँगा तो उसने उसे मना कर दिया था। एक अजनबी के साथ एक ही रात काफ़ी थी। उसे वह रात सुनील के साथ बेइमानी करने के कारण हमेशा याद रहनी थी। इतना ही काफ़ी था।
कोमल खुश थी क्योंकी उसने सुबह ही कर्नल मान से बात की थी और सजल को अपने साथ होटल में रात बिताने की आज्ञा ले ली थी- “मेरी गाड़ी खराब है और उसे ठीक करने में पूरा दिन लग जायेगा। मैं शाम को वापस घर के लिये नहीं निकलना चाहती। मैं बहुत आभारी रहूंगी अगर आप अपने नियम में ढील देकर सजल को मेरे साथ रहने की आज्ञा दे दें। मैं वादा करती हूँ मैं किसी और के माता-पापा को इसके बारे में नहीं बताऊँगी…” कोमल ने बड़ी सफ़ाई के साथ झूठ बोला था।
अपने पूरी मिठास और आकर्षण का इश्तेमाल करते हुए वो बड़ी मुश्किल से उस अड़ियल कर्नल को मना पई थी। उसे महसूश हुआ कि शायद कर्नल भी आकर उसे होटल में चोदना चाहता है। इससे कोमल को बहुत प्रसन्नता हुई। शायद इसी बात से कर्नल की स्वीकृती मिल गई थी। उसने मन में विचार किया कि एक दिन वो इस हट्टे-कट्टे कर्नल को भी चुदाई के लिए फुसलायेगी। वो यह भी सोच रही थी कि क्या अपने बेटे के साथ होटल के एक ही कमरे में अकेले रात बितना ठीक होगा। उसने अपने मन को मनाया कि ज़रूरी तो नहीं कि कुछ हो ही।
हालांकि वो अपने आपको समझा रही थी पर उसे पूरा विश्वास नहीं था। कुछ दिनों से वह सजल को मात्र एक माँ की दृष्टि से नहीं देख रही थी बल्कि… सजल से चुदवाने के ख्याल से ही उसकी चूत ने पानी के फ़ुहारें छोड़नी शुरू कर दिये। इस भावना के आगे वो अपने आपको कमजोर पा रही थी।
“आप सच कह रही हैं कि कर्नल मान ने रात बाहर रहने की आज्ञा दी है…” सजल ने पूछा।
“अब तुम इस बारे में चिंता नहीं करो। मुझे तुम्हें सुबह जल्दी यहाँ पहुंचाना है। इसलिये अभी जल्दी करो…”
“हम कहाँ जा रहे हैं…” सजल ने पूछा।
“यहाँ एक अच्छी पिक्चर चल रही है, उसे देखकर किसी बढ़िया से रेस्त्रां में खाना खाएंगें और फ़िर होटल चलेंगे। क्या तुमने अपने तैरने के वस्त्र साथ लिये हैं…”
जब सजल ने हामी भरी तो कोमल खुश हो गई- “हम बहुत दिन से एक साथ तैरे नहीं हैं। तुमने मुझे डाइव करना सिखाने का वादा किया था…”
“मुझे तो बिल्कुल ऐसा लग रहा है जैसे मैं किसी जवान लड़की के साथ डेट पर जा रहा हूँ…”
“ठीक है तो हम इसे डेट ही कहेंगे। कुछ ही दिनों में तुम लड़कियों के साथ घूमना-फ़िरना शुरू कर दोगे। इससे मुझे तो बड़ी जलन होगी…”
“मुझे उम्मीद है कि वो भी तुम्हारी जैसी ही सेक्सी होंगी…” सजल ने मुश्कुराकर कहा। वो कोमल को बिकिनी में देखने के लिये उत्सुक था। जब वह पिछली बार कोमल के साथ तैरने गया था तो कोमल को देखकर उसका लण्ड खड़ा हो गया था। उसे काफ़ी देर तक पानी में रहना पड़ा था जब तक कि उसका लण्ड वापस अपने वास्तविक स्वरूप में नहीं लौटा था।
“क्या तुम समझते हो कि मैं सेक्सी हूँ…” कोमल को अपने शरीर में एक स्फ़ूर्ति सी महसूस हुई।
“और नहीं तो क्या… तुम क्या समझती हो, जब तुम मुझे छोड़ने आती हो तो क्यों सारे लड़के तुम्हें हेलो करने आते हैं…”